जामिया मिल्लिया इस्लामिया में शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी के प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी

नई दिल्ली : जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) ने कल जापानी संस्थानों और विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए जापान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी (जेएसटी) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की।
जेएसटी प्रतिनिधिमंडल में निदेशक एवं कार्यक्रम अधिकारी श्री ताकाशी कोनिशी और जेएसटी के सकुरा साइंस प्रोग्राम के सलाहकार श्री युजी निशिकावा शामिल थे। बैठक में जेएमआई के वरिष्ठ शैक्षणिक नेतृत्व ने भाग लिया, जिनमें प्रो. उशविंदर कौर पोपली, डीन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध; प्रो. तनुजा, डीन, शैक्षणिक मामले; प्रो. कफील अहमद, डीन, अनुसंधान एवं नवाचार; प्रो. मीतू गुप्ता, अध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग; प्रो. तनवीर अहमद, कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग; प्रो. मोहम्मद जुल्फिकार, भौतिकी विभाग और नैनो विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र के कार्यवाहक निदेशक शामिल थे।
प्रो. उशविंदर कौर पोपली ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिदृश्य का परिचय दिया, विश्वविद्यालय के विविध संकायों, अनुसंधान केंद्रों और चल रहे अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों पर प्रकाश डाला। इसके बाद, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने अपना और अपने-अपने कार्यक्रमों का परिचय दिया। श्री ताकाशी कोनिशी ने जेएसटी के मिशन और कार्यक्रमों पर विस्तृत जानकारी दी और भारत और जापान के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने जेएसटी के हाल ही में शुरू किए गए लोटस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, एनर्जी, मेटेरियल, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमिकन्डक्टर और दूरसंचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उन्नत अध्ययन और अनुसंधान के लिए प्रतिवर्ष 300 युवा भारतीय शोधकर्ताओं को जापान आमंत्रित करना है।
श्री कोनिशी ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि जेएसटी भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के समान कार्य करता है और छात्र एवं संकाय दोनों की मोबिलिटी को सुगम बनाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जामिया के इच्छुक छात्र या संकाय सीधे जापानी मेजबान संस्थानों और संकाय सदस्यों से संपर्क कर सकते हैं, जो आवेदन प्रक्रिया शुरू करेंगे। जेएसटी निजी क्षेत्र की कंपनियों में अवसरों सहित रिसर्च स्टे और इंटर्नशिप के लिए पूर्ण सहायता प्रदान करेगा।
चर्चा के बाद, प्रो. मोहम्मद जुल्फिकार और प्रो. उशविंदर कौर पोपली प्रतिनिधिमंडल को नैनोसाइंस और नैनोटेक्नोलॉजी केंद्र ले गए, जहाँ इस क्षेत्र में जामिया के शोध बुनियादी ढाँचे और सुविधाओं का प्रदर्शन किया गया। प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक वातावरण और सहयोगात्मक भावना की सराहना की। यह यात्रा जामिया के अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव, विशेष रूप से जापान के साथ जुड़ाव को बढ़ाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और अनुसंधान, नवाचार एवं उच्च शिक्षा में सार्थक दीर्घकालिक साझेदारी के लिए मंच तैयार करेगा।
