रतन टाटा को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग सेंटर फॉर नमो स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से किया आग्रह
सीएनएमएस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की अपील, कहा—रतन टाटा का जीवन नैतिक नेतृत्व, परोपकार और राष्ट्र निर्माण की मिसाल

नई दिल्ली, 26 सितंबर। सेंटर फॉर नमो स्टडीज (सीएनएमएस) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी रतन नवल टाटा को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का आग्रह किया है। सीएनएमएस ने कहा कि भारतीय उद्योग, सामाजिक विकास, परोपकार और राष्ट्र निर्माण में रतन टाटा का योगदान असाधारण रहा है।
सेंटर फॉर नमो स्टडीज के चेयरमैन प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि रतन टाटा का व्यक्तित्व केवल एक सफल उद्योगपति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे नैतिक नेतृत्व, विनम्रता और मानवीय संवेदना के प्रतीक थे। टाटा समूह और टाटा ट्रस्ट्स के माध्यम से उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन को प्रभावित किया और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय मानदंड स्थापित किया। राष्ट्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करना उनके प्रति एक उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी।
सीएनएमएस की कार्यकारिणी समिति चेयरमैन ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि रतन टाटा की विरासत कारोबारी उपलब्धियों से कहीं व्यापक है। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने वैश्विक स्तर पर विस्तार किया, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक कल्याण और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में परोपकारी गतिविधियों को भी निरंतर महत्व दिया गया।
ट्रस्टी डॉ. दिव्या तंवर ने कहा कि रतन टाटा को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाना उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े ईमानदारी, जिम्मेदार उद्यमिता, परोपकार और सामाजिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता जैसे मूल्यों को भी सम्मानित करना होगा। ट्रस्टी जावेद रहमानी ने कहा कि रतन टाटा की जीवन-यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
