जामिया मिल्लिया इस्लामिया की ओर से शुल्क संशोधन पर स्पष्टीकरण – केवल नए प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिए प्रभावी, सत्र 2025-26 से; पूर्ववर्ती सत्रों की फीस अपरिवर्तित रहेगी

नई दिल्ली : जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) ने कुछ मीडिया रिपोर्टों पर अपनी ओर से संज्ञान लिया है जिनमें विश्वविद्यालय की वर्तमान में शुल्क संशोधन नीति को भ्रामक रूप से प्रस्तुत किया गया है और यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि सभी पाठ्यक्रमों की फीस मनमाने रूप से बढ़ा दी गई है। जेएमआई स्पष्ट करना चाहती है कि यह दावा असत्य और अतिरंजित है। समाचारों में केवल प्रतिशत वृद्धि दिखाई गई है, वास्तविक शुल्क संरचना नहीं। इसके आधार पर यह केवल मामूली वृद्धि है। सच्चाई यह है कि जहां फीस में मामूली वृद्धि की गई है वहीं कुछ पाठ्यक्रमों में यह घटाई भी गई है।

यह संशोधन मात्र नाम मात्र का है और मुख्यतः स्ववित्तपोषित (Self-financed) पाठ्यक्रमों तथा सीमित संख्या में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर लागू होता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि संशोधित शुल्क केवल नए प्रवेश पाने वाले (सत्र 2025-26) छात्रों पर लागू होंगे, पूर्व के सत्रों में दाख़िला ले चुके छात्रों पर इनका कोई प्रभाव नहीं होगा।

यह भी स्पष्ट किया जाता है कि जेएमआई ने कई वर्षों से किसी बड़े शुल्क संशोधन को लागू नहीं किया है—कुछ मामलों में यह अवधि एक दशक से भी अधिक रही है। वर्तमान समय की लागत और बढ़ती महंगाई को देखते हुए पुरानी शुल्क संरचना को जारी रखना अब संभव नहीं था।

यह मामूली संशोधन भी केवल गहन विचार-विमर्श और विश्वविद्यालय की प्रॉस्पेक्टस समिति द्वारा तीन महीनों तक चली विस्तृत बैठकों के बाद लागू किया गया है। संशोधित शुल्क संरचना 6 मार्च 2025 को प्रकाशित विश्वविद्यालय प्रॉस्पेक्टस में सम्मिलित की गई थी जब सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश की घोषणा की गई थी।

संशोधन तय करते समय विश्वविद्यालय ने अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचनाओं का भी ध्यान में रखा। यह दोहराया जाता है कि जेएमआई अब भी अधिकांश पाठ्यक्रमों के लिए सबसे कम शुल्क लेने वाले विश्वविद्यालयों में शामिल है जिससे यह संशोधन के बाद भी देश के सबसे किफायती विश्वविद्यालयों में गिना जाएगा। यह मामूली संशोधन न केवल महंगाई और बढ़ते परिचालन व्यय को संतुलित करने के लिए है, बल्कि प्रयोगशालाओं, डिजिटल सुविधाओं, साइबर सुरक्षा, कैंपस वाई-फाई तथा अन्य आवश्यक सेवाओं जैसी बुनियादी शैक्षणिक अवसंरचना को मज़बूत करने के उद्देश्य से किया गया है जिससे छात्रों के समग्र अनुभव एवं लाभ को और भी उचित, समग्र और प्रभावी बनाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए और पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के लिए जेएमआई ने सार्क देशों के विदेशी छात्रों की फीस भी घटा दी है तथा यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में आवेदन करने वाले विदेशी छात्रों/एनआरआई अभ्यर्थियों के लिए फीस में भारी कमी की है। साथ ही प्रबंधन अध्ययन संकाय के विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में भी कमी की गई है।

सस्ती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और नवोन्मेषी पाठ्यक्रम उपलब्ध कराते हुए जेएमआई सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों की सेवा करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ता से दोहराती है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने जहां फीस में मामूली वृद्धि की है वहीं कुछ पाठ्यक्रमों में यह घटाई भी गई है।

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