मोदी सरकार के 12 वर्षों में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव आया है: श्याम जाजू वरिष्ठ भाजपा नेता, ‘नमो विकसित भारत संवाद’ में
"महिलाओं का सशक्तिकरण परिवारों, समुदायों और राष्ट्र को मजबूत बनाता है": डॉ. इमाम उमर इलियासी
सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज और डीएआईसी ने माँ हीराबेन मोदी की जयंती पर मोदी सरकार के 12वर्षसेवाकाल पर ‘नमो विकसित भारत संवाद’ राष्ट्रीय सेमिनार श्रृंखला शुरू की

“विकसित भारत का निर्माण केवल महिलाओं के सशक्तिकरण से ही हो सकता है”: जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी, नमो अध्ययन केन्द्र और डीएआईसी संगोष्ठी में
नई दिल्ली, 19 जून, 2026: “नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष सेवाकाल में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव आया है।” इस अवसर पर बोलते हुए, भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू ने सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज एवं भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से आयोजित 12 सेमिनारों की राष्ट्रीय श्रृंखला ‘नमो विकसित भारत संवाद’ का उद्घाटन माँ हीराबेन मोदी की जयंती पर किया।

मुख्य अतिथि और भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू ने कहा, “आज महिलाएं केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता हैं।”
नई दिल्ली के डॉ अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित उद्घाटन सेमिनार मुख्य रूप से दो विषयों पर केंद्रित था: “विकसित भारत की नींव के रूप में नारी शक्ति” और “कल्याणकारी योजनाओं से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की ओर।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी ने कहा, “किसी राष्ट्र की प्रगति उसकी महिलाओं की स्थिति और भागीदारी पर निर्भर करती है। विकसित भारत का निर्माण तभी हो सकता है जब महिलाओं को राष्ट्रीय जीवन के हर क्षेत्र में समान अवसर, सम्मान और सार्थक भूमिका मिले। विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास आवश्यक है।”
सभा को संबोधित करते हुए विशिष्ट मुख्य अतिथि ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम मौलाना डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी जी ने कहा, “परिवारों, समुदायों और राष्ट्र की प्रगति के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण आवश्यक है। एक मजबूत और विकसित भारत तभी उभर सकता है जब महिलाओं को हर क्षेत्र में योगदान देने और नेतृत्व करने के समान अवसर दिए जाएं।” मिशन सर्वार्थ सेवा फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. बसंत गोयल, जो विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए, ने कहा कि भारत ने महिलाओं को सिर्फ़ कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा उठाने वाली मानने से लेकर देश के विकास की प्रक्रिया में उन्हें सक्रिय भागीदार और लीडर के तौर पर पहचानने तक का एक ऐतिहासिक बदलाव देखा है।
डी ए आई सी की डॉ. स्वाति एस. मिश्रा ने कहा, “महिलाओं पर केंद्रित कल्याण से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास तक का सफ़र ‘नए भारत’ के सबसे अहम बदलावों में से एक है।”

दोनों सत्रों के उद्बोधन में, सेंटर फ़ॉर नमो स्टडीज़ के संस्थापक और चेयरमैन प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वर्गीय माता माँ हीराबेन मोदी जी को नमो अध्ययन केन्द्र प्रतिवर्ष जयन्ती और पुण्यतिथि को किसी विशेष राष्ट्रीय विषय पर कार्यक्रम आयोजित करता है। जिसका ये पहल आज
“नमो विकसित भारत संवाद एक राष्ट्रीय बौद्धिक एक पहल है, जिसका मकसद पिछले बारह वर्षों में भारत में हुए बड़े बदलावों की समीक्षा करना और ‘विकसित भारत’ के विज़न पर सार्थक शैक्षिक और पॉलिसी चर्चाओं के लिए एक मंच तैयार करना है।”
प्रो. जसीम मोहम्मद ने आगे कहा, “हमारी जानकारी के मुताबिक, सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज देश का पहला स्वयं सेवी संस्था-थिंक टैंक है जिसने नरेंद्र मोदी सरकार के बारह सालों पर बारह सेमिनार की एक खास राष्ट्रीय बारह संस्करण का राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की है। इस पहल का मकसद उपलब्धियों को दर्ज करना, जानकारी पूर्ण चर्चाओं को बढ़ावा देना और राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की भागीदारी को प्रेरित करना है।”
इस सत्र में मुख्य वरिष्ठ अतिथि के तौर पर राजमाता अंबिका अन्नपूर्णा जी खीर भवानी, अलीगढ़ के सिकंदरपुर माछुआ गाँव की ग्राम प्रधान श्रीमती कल्पना सिंह, दिव्य फ़ाउंडेशन की प्रो. दिव्या तंवर, वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल माहेश्वरी, एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. आमना मिर्ज़ा, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. अपर्णा सिंह, डॉक्टर दीबा और डीएआईसी की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. स्वाति एस. मिश्रा शामिल हुईं और उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व, सशक्तिकरण और राष्ट्र-निर्माण पर अपने विचार रखे।

उदघाटन सत्रों का संचालन जावेद रहमानी, डॉ. दीबा और डॉ. आमना मिर्ज़ा ने किया। पहले सेशन में धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. स्वाति एस. मिश्रा ने पेश किया। कार्यक्रम सफल आयोजन में श्रुति सकराल, सविता, तुषिता भंडारी, आशना, मरियम हारून, अलीशा ज़ैनब शाही रज़ा खान एवं वंशित मेहता शामिल थे।
