माननीय राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश ने नई दिल्ली, भारतीय संसद के केंद्रीय कक्ष में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण दिया

माननीय राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश ने आज नई दिल्ली, भारतीय संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण दिया।

लोकसभा अध्यक्ष एवं 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के अध्यक्ष माननीय श्री ओम बिरला, माननीय सदनाध्यक्षों, ब्रिक्स सदस्य तथा साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों, मान्यवरों और गणमान्य प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि केंद्रीय कक्ष में सभी गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों का उपस्थित होना सम्मान की बात है। उन्होंने बताया कि यह ऐतिहासिक कक्ष भारत के विश्व के सबसे बड़े, सबसे जीवंत और सफल लोकतंत्रों में से एक के रूप में विकास का मौन लेकिन जीवंत साक्षी रहा है। उन्होंने भारत को ज्ञान, बुद्धि और सभ्यतागत विरासत का शाश्वत भंडार बताया, जिसमें संस्कृतियों, भाषाओं, परिदृश्यों, रीति-रिवाजों और परंपराओं की समृद्ध विविधता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रतिनिधि भारत देश के बारे में गर्मजोशी भरे और स्थायी प्रभाव लेकर लौटेंगे।

समूह की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उपसभापति ने कहा कि विश्व की लगभग 49.5% आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रिक्स वैश्विक तथा क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर परामर्श और सहयोग के लिए एक प्रभावी बहुपक्षीय मंच बन गया है।

श्री हरिवंश ने स्मरण किया कि 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान भारत ने, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, “जन-केंद्रित” और “मानवता सर्वप्रथम” दृष्टिकोण की एक परिवर्तनकारी परिकल्पना प्रस्तुत की। इसी परिकल्पना से प्रेरित होकर ब्रिक्स प्रक्रिया ने “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण” विषय को अपनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस समूह के विस्तार की वकालत की और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ तथा विश्वास को मजबूत किया। इसके अलावा, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की भारत की अध्यक्षता का परिणाम नई दिल्ली घोषणा के रूप में सामने आया, जिसने वैश्विक शासन सुधारों को आगे बढ़ाया और अधिक संतुलित, बहुध्रुवी विश्व व्यवस्था को बढ़ावा दिया।

उद्घाटन सत्र के विषय “जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना” पर विचार करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि यह समय की मांग और प्रासंगिकता रखता है। उन्होंने देखा कि दुनिया भर के नागरिक संसदों से उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से जवाब देने की अपेक्षा करते हैं, चाहे वे आर्थिक अनिश्चितता, तकनीकी परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों या सामाजिक असमानताओं कहीं से से उत्पन्न हों। इसलिए, इन तेजी से बदलते समय में संसदों और विधानमंडलों को सतर्क, उत्तरदायी, गतिशील और भविष्य के लिए तैयार बने रहना होगा। उन्होंने कहा कि मंच में होने वाली चर्चाएं अनुभवों का आदान-प्रदान करने, एक-दूसरे से सीखने और लोगों के जीवन को सार्थक रूप से सुधारने में योगदान देने वाले संसदीय दृष्टिकोणों की पहचान करने का अवसर प्रदान करेंगी।

अंत में, 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की कार्यवाही शुरू होते हुए उपसभापति ने सभी प्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनकी उत्पादक चर्चाओं, सफल परिणामों तथा भारत में सुखद और स्मरणीय प्रवास की कामना की।

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