एएमयू में आईसीईसीआई-2026 का समापन, कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस में वैश्विक शोध और नवाचार की झलक

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “इमर्जिंग कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस (आईसीईसीआई-2026)” का बीते दिवस समापन हो गया।

समापन सत्र में एएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज मुख्य अतिथि के रूप में तथा डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. मोहम्मद अथर अंसारी विशिष्टअतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर एएमयू के रजिस्ट्रार और कॉन्फ्रेंस चेयर प्रो. आसिम जफर, कंप्यूटर साइंस विभाग के चेयरपर्सन और कॉन्फ्रेंस के जनरल चेयर प्रो. अरमान रसूल फरीदी तथा डॉ. मोहम्मद साजिद भी मौजूद थे।

मुख्य अतिथि प्रो. मोहम्मद गुलरेज ने उच्च शैक्षणिक मानकों के साथ बड़े स्तर पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए विभाग कीसराहना की। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई तकनीकों को अधिक सुलभ और समाज के लिए उपयोगी बनाना जरूरी है। साथ ही उन्होंने उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्धता और अनुशासन के महत्व पर भी जोर दिया।

अपने संबोधन में प्रो. मोहम्मद अथर अंसारी ने शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया और छात्रों व शोधकर्ताओं को कंप्यूटर साइंस के विकसित होते क्षेत्र में गंभीरता से योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए प्रो. आसिम जफर ने बताया कि 2026 संस्करण में लगभग 603 शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से कड़े तीन-स्तरीय मूल्यांकन के बाद केवल 75 का चयन किया गया। सम्मेलन में 10 समानांतर ट्रैक और 67 प्रस्तुतियां हाइब्रिड मोड में आयोजित की गईं, जो उच्च शैक्षणिक स्तर और वैश्विक भागीदारी को दर्शाती हैं।

प्रो. अरमान रसूल फरीदी ने सम्मेलन के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसने कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नवीन शोध और व्यावहारिक अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा दिया।

सम्मेलन के दौरान प्लेनरी, तकनीकी और औद्योगिक सत्रों की श्रृंखला आयोजित की गई, जिनमें अकादमिक और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। मोहम्मद सुहैल ने सुपरकम्प्यूटिंग में इंफ्रास्ट्रक्चर और परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग पर विचार रखे। डॉ. मारिया लैपिना ने “ट्रस्टेड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” पर व्याख्यान दिया, जिसमें सुरक्षा, पारदर्शिता और नैतिक पहलुओं परचर्चा की गई। डॉ. शाहिद तुफैल ने ऊर्जा क्षेत्र में मशीन लर्निंग के उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, महरोज अली पाशा ने अपने मुख्य व्याख्यान में उद्योग की अपेक्षाओं, व्यावहारिक कौशल और वास्तविक समस्याओं के समाधान पर जोर दिया।

इससे पूर्व डॉ. मोहम्मद नदीम ने ऐसे सत्रों की उपयोगिता बताई, जो अकादमिक शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करते हैं। सत्र का समन्वय डॉ. फराज मसूद और डॉ. मोहम्मद नदीम ने किया, जबकि संचालन सुश्री अनुश्का वाष्र्णेय ने किया।

समापन सत्र का अंत डॉ. मोहम्मद साजिद के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

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