स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा की 40वीं पुण्यतिथि पर नई दिल्ली में भव्य स्मृति समारोह आयोजित

नई दिल्ली : देश के प्रख्यात साहित्यकार, कवि, पत्रकार और जनचिंतक स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा की 40वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हॉल में ‘विश्व हिंदी परिषद’ और ‘श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट’ द्वारा ‘श्रीकांत वर्मा स्मृति समारोह’ एवं ‘श्रीकांत वर्मा स्मरांजलि’ का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में साहित्यिक चर्चा, काव्य पाठ, स्मृति चर्चा और सम्मान वितरण का सुंदर समन्वय देखने को मिला। इसका उद्देश्य स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा के साहित्यिक, वैचारिक, पत्रकारितीय और सांस्कृतिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना तथा हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को जीवंत रखना था।
कार्यक्रम का आरंभ स्व. श्रीकांत वर्मा के जीवन, साहित्यिक अवदान, पत्रकारिता और राजनीतिक योगदान के परिचय से हुआ। इसके बाद विशिष्ट अतिथियों, वरिष्ठ साहित्यकारों और वर्मा परिवार के सदस्यों ने दीप प्रज्ज्वलित कर स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
विश्व हिंदी परिषद, VHP, के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. बिपिन कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए स्व. श्रीकांत वर्मा के साहित्यिक अवदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि श्रीकांत वर्मा ने अपने समय की पीड़ा, समाज की वेदना और सत्ता की खामोशी को अपनी कविता में अभिव्यक्त किया। सत्ता के निकट रहते हुए भी उन्होंने सत्ता से प्रश्न करने का साहस दिखाया। डॉ. बिपिन कुमार ने स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने की मांग की और कहा कि इस संबंध में भारत सरकार को औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाएगा।

इस अवसर पर डॉ. अभिषेक वर्मा ने श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट की ओर से उपस्थित साहित्यकारों और विशिष्ट अतिथियों को स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा की प्रसिद्ध पुस्तक ‘मगध’ और मोती माला भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में श्रीकांत वर्मा के साहित्यिक अवदान, रचनात्मक व्यक्तित्व और वैचारिक विरासत पर आधारित चार मिनट के वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया।
डॉ. अभिषेक वर्मा ने अपने पिता को भावुक शब्दों में याद करते हुए कहा कि स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ते हुए भी अंतिम समय तक संघर्षरत रहे। उन्होंने घोषणा की कि 18 सितंबर को श्रीकांत वर्मा जी के जन्मदिन के अवसर पर साहित्य, पत्रकारिता, कला और युवा लेखन के क्षेत्र में विशेष सम्मान प्रदान किए जाएंगे। इनमें शिखर सम्मान, साहित्य, 21 लाख रुपये, पत्रकारिता सम्मान 5 लाख रुपये, कला सम्मान 2 लाख रुपये और युवा साहित्यकार सम्मान, 45 वर्ष से कम आयु, 2 लाख रुपये शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि ‘मगध’ हिंदी साहित्य की एक अनुपम कृति है, जिसमें सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय यथार्थ को अत्यंत गहराई से चित्रित किया गया है।
श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट की प्रबंध न्यासी एन्का वर्मा ने भावुक स्वर में कहा कि श्रीकांत वर्मा एक महान और अत्यंत संवेदनशील कवि थे। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे उनसे व्यक्तिगत रूप से कभी नहीं मिलीं, लेकिन उनकी रचनाओं के माध्यम से आज भी उनसे बहुत कुछ सीखती हैं। उनकी संवेदनशीलता और शब्दों की गहराई आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक वाजपेयी ने श्रीकांत वर्मा की कविताओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि वे एक लड़ाकू कवि थे। वे अपने वैचारिक और काव्यात्मक तेवर को कभी स्थगित नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि श्रीकांत वर्मा हिंदी के उन महत्वपूर्ण कवियों में थे जिन्होंने 20वीं सदी के अंधेरे को गहराई से पहचाना और उसे अपनी कविता में स्वर दिया।

प्रख्यात साहित्यकार और कला समीक्षक श्री विनोद भारद्वाज ने ‘कला एवं आलोचना’ विषय पर कहा कि श्रीकांत वर्मा के तेवर अपने समय के अन्य साहित्यकारों से अलग थे। दुनिया बदल जाती है, लेकिन स्मृतियाँ रह जाती हैं।
जनसत्ता के पूर्व संपादक श्री ओम थानवी ने ‘श्रीकांत वर्मा के बौद्धिक तेवर’ विषय पर कहा कि श्रीकांत जी बड़े साहित्यकार और बड़े पत्रकार थे। उन्होंने कहा कि दिनमान की पत्रकारिता को याद करते समय श्रीकांत वर्मा का स्मरण अनिवार्य रूप से होता है। वे उस दौर के प्रतिनिधि थे जब साहित्यकार पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाते थे।
कला, संस्कृति, फिल्म और रंगमंच समीक्षक श्री रवीन्द्र त्रिपाठी ने “पत्रकारिता और श्रीकांत वर्मा” विषय पर बोलते हुए कहा कि पत्रकारिता समाज में घट रही घटनाओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है और पत्रकारिता तथा आधुनिक साहित्य का इतिहास एक दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है।
वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती अदिति राजपूत ने “वर्तमान पत्रकारिता और श्रीकांत वर्मा” विषय पर कहा कि श्रीकांत वर्मा ने यह स्थापित किया कि पत्रकारिता केवल उद्योग नहीं, बल्कि लोक चेतना है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता पहले मिशन थी, फिर प्रोफेशन बनी और आज बाजार के दबावों से प्रभावित हो रही है।
प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो. पूरनचंद टंडन ने ‘कथा एवं साहित्य’ विषय पर कहा कि श्रीकांत वर्मा के गद्य में उनकी सहृदयता परिलक्षित होती है। उनके साहित्य में युगबोध, कालबोध, सामाजिक बेचैनी और राष्ट्रीय चेतना स्पष्ट दिखाई देती है।

कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध आलोचक प्रो. अरविंद त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समारोह में श्री ओम थानवी, डॉ. पूरनचंद टंडन, श्री रवीन्द्र त्रिपाठी, डॉ. बिपिन कुमार, श्री अशोक वाजपेयी, श्री विनोद भारद्वाज, श्रीमती अदिति राजपूत, प्रो. अरविंद त्रिपाठी सहित अनेक साहित्यकार, पत्रकार, बुद्धिजीवी और कलाकार उपस्थित रहे।
समारोह का समापन स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर किया गया। यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का अवसर रहा, बल्कि हिंदी साहित्य, पत्रकारिता और वैचारिक विमर्श के क्षेत्र में स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा के अमूल्य योगदान को पुनः स्मरण करने का एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।
