रेजेन एशिया समिट, सिंगापुर में एएमयू के युवा प्रतिनिधियों ने प्रस्तुत किया पुनर्निमाणकारी विकास का दृष्टिकोण

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एक युवा प्रतिनिधिमंडल ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित रेजेन एशिया समिट 2025 में प्रभावशाली भागीदारी दर्ज की।
इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल एएमयू के वनस्पति विज्ञान विभाग (बॉटनी) के बी.एससी. पांचवें सेमेस्टर के छात्र सैयद साइब सलमान, जुबैदा स्वालेहा, हर्षित जैन, दीक्षा वाष्र्णेय, अशमिल शश, नबीहा नदीम, अब्दुल रहमान सलमानी और तरब जावेद ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने पुनरुत्पादन, सतत विकास और तकनीकी समाधानों पर वैश्विक संवादों में सक्रिय भागीदारी की।
एएमयू की टीम ने सततता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाते हुए नवोन्मेषी विचार प्रस्तुत किए और सहयोग की भावना के साथ कार्य किया, जिससे यह संदेश गया कि भारतीय युवा जलवायु कार्रवाई और पुनरुत्पादक विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
समिट के पहले दिन “नेट जीरो से नेट पॉजिटिव” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित हुई, जिसका नेतृत्व मलेशिया की पूर्व ऊर्जा मंत्री बियो यिन यो और आईपीसीसी रिपोर्ट के सह-लेखक डॉ. रोडेल लैस्को ने किया। इस सत्र में तकनीक, वित्त और वाणिज्यिक रणनीतियों के साथ-साथ जलवायु संवाद में भाषा की भूमिका, ग्रीन नौकरियों का निर्माण, एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने और नेतृत्व निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
अन्य सत्रों में “द फ्यूचर वी स्टीवर्ड”, “साउथ एशिया में सर्कुलर इकोनॉमी के तहत पुनरुत्पादक आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण”, “सिस्टम थिंकिंगरू वनों की बहाली और वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्स्थापना”, और “जस नॅचुरेरू प्रकृति को कानूनी व्यक्ति का दर्जा देना ही वैश्विक पुनरुत्पादन की कुंजी” जैसे विषयों को शामिल किया गया।
समिट का एक विशेष आकर्षण प्रतिभागियों के साथ सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम के साथ एक संवादात्मक सत्र था। उन्होंने अपने संबोधन में पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के बीच गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए पुननिर्माणकारी विकास पर अपने विचार साझा किये।
