भारतीय वन्यजीव पारिस्थितिकी सम्मेलन में एएमयू शिक्षक ने की संगोष्ठी की अध्यक्षता

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वन्यजीव विज्ञान विभाग के डॉ. अहमद मसूद खान ने हरियाणा के सोनीपत स्थित अशोका विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय वन्यजीव पारिस्थितिकी सम्मेलन-2026 के दौरान ‘दबाव की स्थिति में व्यवहारः मानव हस्तक्षेप से वन्यजीव पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव’ विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता की।
सम्मेलन में भारत और विदेश के प्रमुख शिक्षण एवं शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों, वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा वन्यजीव पारिस्थितिकी और संरक्षण के क्षेत्र में हाल की प्रगति पर विचार-विमर्श किया। संगोष्ठी में विशेष रूप से मानव गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाले व्यवधानों का वन्यजीवों के व्यवहार, पारिस्थितिकी और संरक्षण पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र, भारतीय विज्ञान संस्थान, अशोका विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय, डीकिन विश्वविद्यालय, कॉर्नेल विश्वविद्यालय तथा भारती विद्यापीठ पर्यावरण शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने छोटे मांसाहारी जीवों की पारिस्थितिकी, एशियाई हाथियों के व्यवहार में होने वाले बदलाव, कृत्रिम प्रकाश का सरीसृपों पर प्रभाव, मृतभक्षी जीवों की पारिस्थितिकी तथा मानव गतिविधियों के प्रति वन्यजीवों की प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए।
वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अहमद मसूद खान ने प्रत्येक शोध प्रस्तुति के बाद चर्चा का संचालन किया। उन्होंने कहा कि बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के बीच वन्यजीवों के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों को समझना प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन रणनीतियां तैयार करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व तथा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित संरक्षण योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए बहुविषयक अनुसंधान की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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