एएमयू शोधकर्ताओं को सांस आधारित डायबिटीज का पता लगाने वाले सेंसर के लिए मिला पेटेंट

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के डॉ मोहम्मद जैन खान और प्रो. सुहैल सबिर के नेतृत्व में कार्यरत शोधकर्ताओं की एक टीम को मानव श्वांस में एसिटोन की पहचान करने वाले एक अति संवेदनशील इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर के विकास के लिए भारतीय पेटेंट प्रदान किया गया है, जो मधुमेह की प्रारंभिक पहचान में सहायक होगा।

यह नवाचारी सेंसर न केवल तैयार करने में सरल है बल्कि उपयोग में भी आसान है और माइक्रोमोलर सांद्रता में एसिटोन की पहचान करने में सक्षम है, जिससे यह एक प्रभावी गैर-आक्रामक डायग्नोस्टिक उपकरण बनता है। एसिटोन एक वाष्पशील कार्बनिक यौगिक है जो श्वास में पाया जाता है और मधुमेह का एक स्थापित बायोमार्कर है।

डॉ खान और प्रो. सबिर के साथ इस शोध टीम में डॉ आदिल शफी गनी और डॉ साइमा सुल्ताना भी शामिल हैं। इस खोज से ऐसे किफायती और त्वरित निदान उपकरणों का मार्ग प्रशस्त होगा जो मधुमेह की समय रहते पहचान कर प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं।

डॉ जैन खान, जिनका शोध कार्य इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर और प्वाइंट-ऑफ-केयर तकनीकों पर केंद्रित है, अब तक 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं तथा 1.2 करोड़ रूपये से अधिक की परियोजनाएं पूरी कर चुके हैं और उन्हें एएमयू का आउस्टैंडिंग रिसर्चर अवार्ड, बेस्ट ओरल प्रेजेंटर अवार्ड और मॉलिक्यूल अवार्ड जैसे अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनके शोध को 5,700 से अधिक बार उद्धृत किया गया है और उनका एच-इंडेक्स 40 व आई10-इंडेक्स 80 है।

डॉ खान ने कहा कि यह नवाचार न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र बल्कि पर्यावरण और सामाजिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डायबिटीज की समय रहते पहचान से मरीज जीवनशैली में बदलाव कर रोग को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं।

इससे पूर्व, डॉ खान को रीयल-टाइम सेंसर विकसित करने के लिए भी पेटेंट प्राप्त हो चुका है, जो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड की निगरानी करते हैं और सतत तकनीकी व सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित करते हैं।

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