एएमयू और इन्फ्लिबनेट केंद्र के बीच समझौता, क्षेत्रीय स्तर के कार्यक्रम की भी घोषणा

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और गांधीनगर स्थित इन्फ्लिबनेट केंद्र के बीच डिजिटल पुस्तकालय सेवाओं, शोध सहयोग, शैक्षणिक प्रकाशन, क्षमता विकास तथा शैक्षणिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से विश्वविद्यालय की डिजिटल शोध व्यवस्था को और सशक्त बनाने तथा शैक्षणिक सहयोग का दायरा बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

समझौता ज्ञापन पर कुलपति कार्यालय में कुलपति प्रो. नइमा खातून, सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खां, कुलसचिव प्रो. आसिम जफर, इन्फ्लिबनेट केंद्र की निदेशक प्रो. देविका पी. मदल्ली, कार्यवाहक विश्वविद्यालय पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. निशात फातिमा, जनसंपर्क कार्यालय की मेम्बर इंचार्ज प्रो. विभा शर्मा, उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मोनव्वर इकबाल तथा मौलाना आजाद पुस्तकालय के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. सैयद शाज हुसैन की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. नइमा खातून ने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि इस सहयोग से एएमयू की डिजिटल शोध संरचना मजबूत होगी, राष्ट्रीय स्तर की शोध सहायता सेवाओं तक बेहतर पहुँच मिलेगी, शैक्षणिक प्रकाशन को प्रोत्साहन मिलेगा तथा शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति और शोध उत्कृष्टता को नई दिशा देगी।

कार्यक्रम की प्रमुख घोषणा करते हुए इन्फ्लिबनेट केंद्र की निदेशक प्रो. देविका पी. मदल्ली ने बताया कि आने वाले महीनों में क्षेत्रीय स्तर का इन्फ्लिबनेट कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय नोडल विश्वविद्यालय की भूमिका निभाएगा। इस घोषणा का उपस्थितजनों ने स्वागत किया और इसे एएमयू की शैक्षणिक एवं शोध क्षेत्र में अग्रणी भूमिका को और मजबूत करने वाला कदम बताया।

इससे पूर्व मौलाना आजाद पुस्तकालय एवं इन्फ्लिबनेट केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में इन्फ्लिबनेट सेवाओं पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, निदेशक, शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, शोधार्थी तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में इन्फ्लिबनेट की डिजिटल शोध सहायता सेवाओं तथा उच्च शिक्षा में उनकी उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. निशात फातिमा ने कहा कि संस्थागत सहयोग से विश्वविद्यालय की डिजिटल संरचना, शोध क्षमता तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए इन्फ्लिबनेट सेंटर की निदेशक प्रो. देविका पी. मदल्ली ने भारत में उच्च शिक्षा और अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से केंद्र की प्रमुख पहलों की जानकारी दी। उन्होंने आर्टिकल प्रोसेसिंग चार्ज (एपीसी) सहायता पहल का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से शोधकर्ताओं को प्रतिष्ठित ओपन एक्सेस पत्रिकाओं में शोध-पत्र प्रकाशित कराने के लिए प्रकाशन शुल्क के आर्थिक बोझ को कम करने में सहायता मिलती है, जिससे भारतीय शोध की वैश्विक दृश्यता और पहुँच बढ़ती है। उन्होंने वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ओएनओएस), शोधचक्र, तथा अनुसंधान प्रबंधन, संस्थागत रिपॉजिटरी, साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) की जांच, शोधकर्ता प्रोफाइलिंग और विद्वत संचार के लिए इन्फ्लिबनेट के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों की भी विस्तार से जानकारी दी।

सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने कहा कि इन्फ्लिबनेट देश के शैक्षणिक समुदाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सहायता प्रणालियों में से एक बन चुका है। सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. इकराम हुसैन ने राष्ट्रीय शैक्षणिक सूचना नेटवर्क की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे शोध की गुणवत्ता, बहुविषयक सहयोग तथा संस्थागत पहचान को बढ़ावा मिलता है।

इन्फ्लिबनेट केंद्र के वैज्ञानिक ‘एफ’ डॉ. अभिषेक कुमार ने तकनीकी सत्र में इन्फ्लिबनेट के डिजिटल मंचों और शोध सहायता सेवाओं का विस्तृत प्रदर्शन किया। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, पुस्तकालयाध्यक्षों तथा स्वतंत्र शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए बताया कि इन सुविधाओं का उपयोग शोध सामग्री की खोज, शोध प्रबंधन, साहित्यिक समानता की जाँच, शोधकर्ता परिचय, संस्थागत अभिलेखागार तथा शैक्षणिक प्रकाशन जैसे कार्यों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इन सेवाओं के माध्यम से राष्ट्रीय डिजिटल शोध संरचना का अधिकतम लाभ कैसे उठाया जा सकता है। डॉ. अभिषेक कुमार का यह सत्र शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सैयद शाज हुसैन ने किया, जबकि उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. आसिफ फरीद सिद्दीकी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.