लोकसभा अध्यक्ष ने लोकतंत्र में विचारों की भिन्नता के बावजूद आपसी सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया

 

लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज इस बात पर बल दिया कि लोकतंत्र में विचारों और दृष्टिकोणों में भिन्नता होना स्वाभाविक है, लेकिन असहमति व्यक्त करते समय परस्पर सम्मान और गरिमा सदैव बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संत कबीर की शिक्षाएं हमें विचारों में मतभेद होने के बावजूद वाणी में संयम, नैतिक आचरण और दूसरों के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश देती हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित कबीरधाम आश्रम में आयोजित संत कबीर महोत्सव एवं कबीर स्मृति भवन के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि संत कबीर का करुणा, समानता और सामाजिक समरसता का शाश्वत संदेश छह शताब्दियों के बाद भी समाज का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि संत कबीर की शिक्षाओं का व्यापक प्रसार समाज में संवेदनशीलता, पारस्परिक समझ और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देगा।

सामाजिक सुधारों में संत कबीर के उल्लेखनीय योगदान का स्मरण करते हुए श्री बिरला ने कहा कि जिस समय समाज जातिगत भेदभाव, धार्मिक मतभेदों और सामाजिक पूर्वाग्रहों से विभाजित था, उस समय संत कबीर ने प्रचलित रूढ़ियों को चुनौती दी और समाज को बांटने वाली दीवारों को तोड़ने का कार्य किया। जनसाधारण की भाषा में रचित अपने सरल किंतु गहन अर्थ वाले दोहों के माध्यम से उन्होंने सत्य, नैतिकता, समानता और सदाचरण का सार्वभौमिक संदेश दिया। श्री बिरला ने कहा कि इन शिक्षाओं की निरंतर प्रासंगिकता इस बात का प्रमाण है कि इनमें पीढ़ी-दर-पीढ़ी सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा देने की असाधारण शक्ति है।

आत्मचिंतन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री बिरला ने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे, “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय; जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दूसरों में दोष खोजने के बजाय प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण और कमियों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मचिंतन से विवेक और विनम्रता का विकास होता है तथा दूसरों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता की भावना प्रबल होती है।

श्री बिरला ने आगे कहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान और विरासत उसके पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और समाज के प्रति योगदान से निर्धारित होती है। संत कबीर के सादगीपूर्ण जीवन और उनके स्थायी प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ कर्म, निःस्वार्थ सेवा और दूसरों के कल्याण के प्रति समर्पण समाज पर अमिट छाप छोड़ते हैं।

कबीर स्मृति भवन के महत्व का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान संत कबीर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और भावी पीढ़ियों को उनके आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने संत कबीर के आध्यात्मिक ज्ञान, जन-केंद्रित दृष्टिकोण और तर्कपूर्ण विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर श्री बिरला ने संत असंग देव जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और भारत सहित विश्व के विभिन्न भागों में संत कबीर की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार तथा समाज सेवा के प्रति उनके आजीवन समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्याग, अनुशासन और निःस्वार्थ समर्पण से परिपूर्ण संतों का जीवन समाज को आध्यात्मिक शक्ति और प्रेरणा प्रदान करता है। उन्होंने संत कबीर के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले संतों और अनुयायियों के योगदान की भी सराहना की।

श्री बिरला ने सभी से संत कबीर की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने, वाणी में संयम रखने, आत्मचिंतन की आदत विकसित करने तथा दूसरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, संत असंग देव जी महाराज, अनेक जनप्रतिनिधि, संतगण तथा बड़ी संख्या में संत कबीर के अनुयायी उपस्थित थे।

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