उपराष्‍ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने डॉ. एनटीआर विश्वविद्यालय के रूबी जयंती समारोह में कहा, चिकित्सा अनुसंधान का उपयोग मानवता की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए होना चाहिए

उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में डॉ. एनटीआर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 40वें वर्षगांठ (रूबी जयंती) समारोह को संबोधित करते हुए चिकित्सा संस्थानों से बेहतर अनुसंधान, नवाचार को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों के उपाय विकसित करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में चार दशक पूर्ण करने पर विश्वविद्यालय को बधाई दी। उन्‍होंने कहा कि यह संस्थान आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और महान नेता डॉ. नंदमुरी तारक राम राव की दूरदर्शिता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि डॉ. एनटीआर की दूरदृष्टि और जनसेवा क्षेत्रीय सीमाओं से व्‍यापक और राष्ट्र कल्याण की प्रतिबद्धता से भरी थी।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्‍लेख करते हुए कहा कि भारत में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 से पहले की अपेक्षा 387 से बढ़कर अब 846 हो गई है, जो दोगुने से भी अधिक है। उन्‍होंने कहा कि एमबीबीएस की सीटें 172 प्रतिशत बढ़कर लगभग 51 हजार से एक लाख चालीस हजार से अधिक हो गई हैं, जबकि स्नातकोत्तर सीटें 177 प्रतिशत बढ़कर लगभग 31 हजार से 86 हजार से अधिक पहुंच गई हैं।

उपराष्ट्रपति ने अनुसंधान और नवाचार को अगला पड़ाव बताते हुए प्रतिभाशाली छात्रों से मौजूदा स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान के लिए स्वयं को समर्पित करने को कहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि डॉ. एनटीआर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता चिकित्सा विज्ञान में अपने योगदान द्वारा नोबेल पुरस्कार सहित वैश्विक पहचान हास‍िल करेंगे।

श्री सीपी राधाकृष्णन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल स्वास्थ्य, टेलीमेडिसिन और उन्नत निदान तकनीकों द्वारा स्वास्थ्य सेवा में आ रहे बदलावों को देखते हुए, विश्वविद्यालय को अग्रणी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग स्थापित करने को कहा जिससे छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं को उन्नत अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों की अधिक जानकारी मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी प्रगति- वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, रोगी सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और नैतिक दायित्व द्वारा निर्देशित होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि डॉक्टर-मरीज के सम्‍बंधों में निहित करुणा और मानवीय जुड़ाव का स्थान तकनीक नहीं ले सकती।

उपराष्ट्रपति ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध जागरुकता उत्‍पन्‍न करने में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। उन्होंने नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान को सामूहिक दायित्‍व बताते हुए, चिकित्सा जगत से नशामुक्त समाज के निर्माण प्रयासों में नेतृत्व प्रदान करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के साथ मादक पदार्थों का त्याग करने और नशामुक्त समाज को बढ़ावा देने का संकल्‍प लिया। विश्वविद्यालय के 40 वर्षों के स्मरणोत्सव के उपलक्ष्य में उन्होंने एक स्मृति चिन्ह भी जारी किया। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री एस. अब्दुल नज़ीर; आंध्र प्रदेश सरकार के आवास, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्री कोलुसु पार्थसारथी; विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. चंद्रशेखर; राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. एम.के. रमेश और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इससे पहले, उपराष्ट्रपति के विजयवाड़ा हवाई अड्डे पर पहुंचने पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस. अब्दुल नज़ीर और आंध्र प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री नारा लोकेश और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

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