एएमयू के विधि विभाग के शिक्षक ने राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्याख्यान प्रस्तुत किया

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विधि विभाग के सहायक प्रोफेसर शहाब शब्बीर ने कश्मीर विश्वविद्यालय, हजरतबल, श्रीनगर के सेंटर
ऑफ सेंट्रल एशियन स्टडीज द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में अतिथि व्याख्यान दिया। यह संगोष्ठी “भारत की विदेश नीति के राजनीतिक आयाम रू मध्य एशिया के साथ राज्य, समाज तथा सांस्कृतिक-आर्थिक संबंध” पर आयोजित की गई थी।
डॉ. शब्बीर ने “सोवियत संघ के विघटन के बाद कमजोर वर्गों के सामाजिक एवं विधिक अधिकारः मध्य एशिया भारत से क्या सीख सकता है” विषय पर अपने व्याख्यान में वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद कजाखस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिजस्तान और ताजिकिस्तान में जातीय एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं, बच्चों, ग्रामीण एवं घुमंतू समुदायों तथा दिव्यांगजन के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक एवं विधिक व्यवस्था, जिसे न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका ने और अधिक सशक्त बनाया है, इन देशों के लिए एक उपयोगी उदाहरण प्रस्तुतकरती है। उन्होंने बताया कि भारत में असमानताओं और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों के बावजूद न्यायिक सक्रियता, विकेंद्रीकरण, सकारात्मक भेदभाव तथा अल्पसंख्यकों के संरक्षण जैसी व्यवस्थाएं विविधतापूर्ण समाज में अधिकारों की रक्षा का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करती हैं, जिसे मध्य एशियाई देशों की परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जा सकता है।
सम्मेलन के दौरान डॉ. शब्बीर ने दो वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता भी की, जिसके लिए आयोजकों और प्रतिभागियों ने उनकी सराहना की।
