जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भारतीय ज्ञान परम्परा पर संपन्न संगोष्ठी का आयोजन

नई दिल्ली  :  जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्कृत विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परम्परा में दार्शनिक परम्पराएं’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओमनाथ बिमली ने किया, जिन्होंने दर्शनशास्त्र को ज्ञान परम्पराओं का मूल बताया। इसी पक्ष को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्द्यालयों में उच्च उपाधि के रूप में डॉक्टर ऑफ़ फिलोसोफी की उपाधि प्रदान कि जाती है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रो. पवन कुमार शर्मा ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।उन्होंने अपने संबोधन में पाश्चात्य विद्वानों पर ‘भारतीय ज्ञान परम्परा के गंभीर प्रभाव को उद्घाटित किया।उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी के संयोजक डॉ.धनञ्जय मणि त्रिपाठी द्वारा सम्पादित ग्रन्थ का विमोचन किया गया।संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में ७० से अधिक विद्वानों और शोध पत्र वाचको ने अपने विचार रखे।

संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्या अतिथि के रूप में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नूपा) के कुलसचिव डॉ. सूर्य नारायण मिश्र मुख्य अतिथि थे ।

भा०ज्ञा प० की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। विभागाध्यक्ष डॉ. ज. प्र.ना० ने समागत जगत में विद्वानों और वक्ताओं का स्वागत किया और शिक्षा जगत में ऐसे आयोजनों के महत्व को रेखांकित किया।

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