‘नमो विकसित भारत संवाद’ के जरिए भारतीय संस्कृति, सभ्यता और युवा चेतना को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की पहल

भारतीय संस्कृति और सभ्यता की समृद्ध विरासत को युवा पीढ़ी की ऊर्जा, आधुनिक सोच और तकनीकी क्षमता से जोड़ते हुए सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ ने “नमो विकसित भारत संवाद” नाम से विशेष शैक्षिक संवाद-श्रृंखला “जड़ों से जुड़ी जेन ज़ी, भविष्य गढ़ता भारत” आयोजित करने की पहल की है। इसके अंतर्गत अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 के दौरान दिल्ली के विभिन्न महाविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में संवाद, परिचर्चा और अकादमिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस पहल का केंद्रीय विषय “जड़ों से जुड़ी जेन ज़ी, भविष्य गढ़ता भारत” रखा गया है। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और युवा चेतना के बीच एक सार्थक एवं समकालीन संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज के अध्यक्ष प्रो जसीम मोहम्मद ने बताया कि, भारत की युवा पीढ़ी देश की सबसे बड़ी रचनात्मक शक्ति है और उसकी प्रतिभा को भारतीय मूल्यों तथा विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
संवाद-श्रृंखला में “संस्कृति से संस्कार, संस्कार से संकल्प, संकल्प से विकसित भारत”, “विरासत से भविष्य तक”, “जड़ों में संस्कृति, सोच में आधुनिकता, संकल्प में भारत”, “मेरी संस्कृति, मेरा गौरव, मेरा भारत” और “परंपरा से प्रगति तक” जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
इसके साथ “जेन ज़ी: भारतीय विरासत की नई आवाज़”, “भारतीयता की जड़ें, जेन ज़ी के पंख” और “विरासत हमारी, भविष्य हमारा” जैसे विषयों के माध्यम से युवाओं की सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्र-निर्माण संबंधी भूमिका को रेखांकित किया जाएगा।
कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विषय-विशेषज्ञों एवं युवा नेतृत्व को संवाद का साझा मंच मिलेगा। भारतीय भाषाओं, साहित्य, इतिहास, लोक परंपराओं और कला-संस्कृति के साथ तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, उद्यमिता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण जैसे समकालीन विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज ने दिल्ली के महाविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को इस पहल से जुड़ने तथा संयुक्त आयोजन, अकादमिक सहयोग और संस्थागत समझौते के माध्यम से सहभागी बनने का आमंत्रण दिया है। संस्था का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से यह पहल युवाओं को केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण की व्यावहारिक जिम्मेदारियों से भी जोड़ेगी।
सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के प्रबन्ध न्यासी प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि आज की जेन ज़ी को आधुनिक तकनीक और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ अपनी भारतीय जड़ों को समझना होगा। भारतीय संस्कृति को केवल अतीत की विरासत मानने के बजाय उसे भविष्य निर्माण की प्रेरक शक्ति के रूप में देखने की आवश्यकता है।
प्रो जसीम मोहम्मद ने कहा कि “जेन ज़ी केवल भारतीय विरासत की उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि उसकी नई वाहक और भविष्य के भारत की निर्माता है।” तकनीक, रचनात्मकता, नवाचार और युवा ऊर्जा को भारतीय मूल्यों से जोड़कर विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को नई दिशा और गति दी जा सकती है।
सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज की इस पहल का मूल संदेश है—
“विरासत • विचार • नवाचार • राष्ट्र निर्माण”
सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज ने दिल्ली के महाविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों से इस अभियान से जुड़कर भारतीय संस्कृति, युवा चेतना और विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने की अपील की है।
