जेएन मेडिकल कालिज के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की चिकित्सका के पहले उपन्यास का विमोचन

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. शहना अली के पहले उपन्यास ‘द व्हाइट कोट्स वेट’ का विमोचन एएमयू स्टाफ क्लब में आयोजित समारोह में किया गया। उपन्यास में चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों की भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों तथा सफेद कोट के पीछे छिपे मानवीय अनुभवों को प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए फारसी की प्रख्यात विद्वान प्रो. नाहिद अजरमी दुख्त सफवी ने उपन्यास की भावनात्मक प्रामाणिकता और साहित्यिक उत्कृष्टता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास दूसरों का उपचार करने के लिए समर्पित लोगों की उन भावनात्मक कमजोरियों और आंतरिक अनुभवों को आवाज देता है, जिनके बारे में आमतौर पर बात नहीं की जाती। इसमें पेशेवर जीवन की वास्तविकताओं और गहरी मानवीय संवेदनाओं का सुंदर मेल है।
मुख्य अतिथि प्रो. ए. आर. किदवई ने डॉ. अली की संवेदनशीलता और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि उपन्यास के विषय चिकित्सा जगत से आगे बढ़कर सार्वभौमिक मानवीय अनुभवों से जुड़ते हैं। उन्होंने इसकी काव्यात्मक भाषा और मानवीय एवं पारिवारिक मूल्यों पर आधारित कथानक को भी सराहा।
सर सैयद अकादमी के निदेशक और सम्मानित अतिथि प्रो. शाफे किदवई ने उपन्यास की साहित्यिक विशेषताओं तथा चिकित्सा पेशे की भावनात्मक वास्तविकताओं को रचनात्मक कथा के माध्यम से प्रस्तुत करने के प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने शिक्षण एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोगों की कलात्मक अभिव्यक्ति के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता और अन्य सम्मानित अतिथि प्रो. मोहम्मद खालिद ने चिकित्सा पेशे से जुड़ी जिम्मेदारियों और भावनात्मक दबावों पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के जीवन में धैर्य, दृढ़ता और करुणा का विशेष महत्व है।
उपन्यास की मुख्य पात्र डॉ. सना एक चिकित्सक है, जिसे गंभीर दीर्घकालिक बीमारी का पता चलता है। कहानी बीमारी को स्वीकार न करने की स्थिति से उसे स्वीकार करने तक के उसके सफर को दर्शाती है। इसमें चिकित्सकों के स्वयं मरीज बन जाने पर उनकी संवेदनशीलता, पेशेवर जीवन की चुनौतियों तथा पारिवारिक सहयोग और करुणा के महत्व को उजागर किया गया है।
कार्यक्रम में लेखिका के पिता और प्रसिद्ध कथाकार प्रो. गजनफर अली, अंग्रेजी विभाग के प्रो. आसिम सिद्दीकी और प्रो. सामी रफीक, उर्दू कथाकार एवं आलोचक प्रो. तारिक छतारी, राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. मुहिबुल हक, चिकित्सा विभाग की डॉ. लुबना जफर और डॉ. अमीना ने भी विचार व्यक्त किए। लेखिका की बेटी इंशा ने उपन्यास लिखने में अपनी मां के समर्पण और मेहनत के बारे में बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शारिक अकील ने किया। धन्यवाद ज्ञापन में डॉ. शहना अली ने अपने परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने पुस्तक को पाठकों तक पहुंचाने के लिए नामक पब्लिकेशंस का भी धन्यवाद किया।
