जामिया ने AI के दौर में साइबर फ्रॉड, डिजिटल हरासमेंट और डीपफेक पर साइबर सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के साइबर क्लब ने, डीन, छात्र कल्याण कार्यालय के तत्वावधान में, 01 अक्टूबर, 2026 को साइबर एरा की मौजूदा और उभरती चिंताओं को रेखांकित करने के लिए “बियॉन्ड द स्क्रीन: AI के दौर में साइबर फ्रॉड, डिजिटल हरासमेंट और डीपफेक” (Beyond the Screen: Cyber Fraud, Digital Harassment and Deepfakes in the AI Era) शीर्षक से एक साइबर सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
इस अवसर पर दिल्ली पुलिस के दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त, आईपीएस श्री विजय कुमार मुख्य अतिथि थे, और मुख्य भाषण दिल्ली पुलिस के एसीपी श्री मनोज कुमार ने दिया, जो जामिया के साइबर क्लब के बाहरी सदस्य भी हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली पुलिस की डीसीपी (लाइसेंसिंग) आईपीएस सुश्री ऐश्वर्या शर्मा और दिल्ली के दक्षिणी जिले की अतिरिक्त डीसीपी (Addl. DCP) आईपीएस सुश्री ऐश्वर्या सिंह भी उपस्थित थीं। जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी इस कार्यक्रम के संरक्षक थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जामिया मिल्लिया इस्लामिया के माननीय कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने की।
अपने स्वागत भाषण में, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र कल्याण की डीन और साइबर क्लब की सलाहकार प्रो. नीलोफ़र अफ़ज़ल ने ज्ञान को सशक्तिकरण का सबसे बड़ा स्रोत बताया, लेकिन साथ ही दर्शकों का ध्यान धोखे के अंधेरे की ओर भी आकर्षित किया, जिसका मुकाबला तकनीक और AI के जिम्मेदार इस्तेमाल से किया जा सकता है। साइबर दुनिया के साथ बातचीत करते समय उनके तीन-चरणीय नियम—”क्लिक करने से पहले रुकें”, “विश्वास करने से पहले पुष्टि करें”, और “कुछ गलत होने पर आवाज़ उठाएं”—ने कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। सुश्री ऐश्वर्या शर्मा ने उन तीन अहम तरीकों पर चर्चा की जिनसे धोखेबाज़ यूज़र्स के डिजिटल भरोसे का फ़ायदा उठाते हैं: साइबर फ्रॉड, डिजिटल हरासमेंट और डीपफेक। उन्होंने लोगों को अपने डिजिटल फ़ुटप्रिंट्स को लेकर सावधान रहने को कहा, क्योंकि एक बार बनने के बाद इन्हें हटाना मुश्किल होता है।
सुश्री ऐश्वर्या सिंह ने साइबर-सुरक्षित रहने के लिए ज़रूरी कुछ अहम बातों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने डर और चिंता की भावनाओं में न बहने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्कैमर्स द्वारा आम लोगों को ठगने के कुछ आम तरीकों के बारे में भी बताया, जैसे डिजिटल अरेस्ट, फ़ाइनेंशियल साइबर फ्रॉड, डीपफेक, पासवर्ड हैकिंग, साइबरबुलिंग और आइडेंटिटी थेफ़्ट।
श्री मनोज कुमार ने डिजिटल पहुँच बढ़ने से पैदा होने वाले AI-आधारित कुछ आम खतरों पर चर्चा की। खास तौर पर, उन्होंने ‘डिजिटल गुलामी’ को एक गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने सुरक्षित रहने के लिए कुछ उपयोगी और व्यावहारिक उपाय बताए, जैसे मोबाइल सॉफ़्टवेयर को अपडेट रखना, धोखाधड़ी की स्थिति में सबूत संभालकर रखना, और तुरंत रिपोर्ट करने व मदद पाने के लिए 1930 पर कॉल करना। उन्होंने लोगों को सतर्क और जागरूक रहने तथा खुद को शिक्षित करने की सलाह दी, क्योंकि सिर्फ़ यह कहना कि “मैं बेगुनाह हूँ” आपको कानून से बचाव नहीं दिला सकता। उन्होंने साइबर सुरक्षा और भलाई को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहलों, जैसे संचार साथी, एम-कवच 2 और डिजी कवच के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने संदिग्ध वेबसाइटों पर जाने और APK फ़ाइलों जैसे मैलवेयर डाउनलोड करने के खतरनाक नतीजों के बारे में विस्तार से बताया।
प्रोफ़ेसर मो. महताब आलम रिज़वी ने सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार और संभावित साइबर हमलों के प्रति सतर्क रहने से जुड़ी अहम बातें समझाने के लिए कुछ निजी किस्सों का इस्तेमाल किया। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे सुरक्षित रहने और साइबर अपराध को फैलने से रोकने के लिए अपनी समझदारी और बुद्धि का इस्तेमाल करें—न सिर्फ़ अपने लिए, बल्कि पूरे समुदाय के फ़ायदे के लिए भी।
श्री विजय कुमार ने अपने निजी अनुभवों के आधार पर एक बहुत दिलचस्प बातचीत में लोगों को बताया कि धोखेबाज़ अलग-अलग समूहों को निशाना बनाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लोग, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, साइबर अपराध का शिकार हो सकते हैं और बताया कि साइबर अपराध की घटनाएं बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। खासकर युवा दर्शकों के लिए उनकी सलाह में कुछ ज़रूरी बातें शामिल थीं जो इन चुनौतियों का सामना करने में मददगार साबित हो सकती हैं—जैसे ऑनलाइन OTP और निजी जानकारी शेयर न करना, अनजान वीडियो कॉल का जवाब न देना, आकर्षक नौकरी के ऑफ़र से सावधान रहना, और अश्लील सामग्री को स्टोर या शेयर करने से सख्ती से बचना। उन्होंने लोगों को ‘म्यूल अकाउंट्स’ के बारे में भी बताया, जिनका इस्तेमाल लोगों को फंसाने के लिए किया जाता है।
प्रोफ़ेसर मज़हर आसिफ़ ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि साइबर दुनिया में आर्थिक अपराध करने वाले लोग अपने पीड़ितों के लालच का फ़ायदा उठाते हैं, इसलिए सतर्क और जागरूक रहना ज़रूरी है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यूनिवर्सिटी समुदाय के बीच उच्च-स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी अपने आप में प्रेरणादायक थी और इससे जागरूकता और शिक्षा का एक मज़बूत संदेश गया। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि वे मोबाइल फ़ोन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सावधानी से करें और इन टेक्नोलॉजी को खुद पर हावी न होने दें।
कार्यक्रम का संचालन जामिया के साइबर क्लब की संयोजक डॉ. उमैमा ने किया। साइबर क्लब के दृष्टिकोण को समझाते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्लब क्विज़, इंटरैक्टिव सत्र, कार्यशालाओं और सेमिनारों जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से स्टेकहोल्डर्स के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे बताया कि क्लब द्वारा ‘साइबर जागरूक दिवस’ मनाने की भी योजना बनाई जा रही है।
डिप्टी डीएसडब्ल्यू डॉ. अस्मत जहां ने धन्यवाद ज्ञापन के माध्यम से उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
