एएमयू विमेंस कॉलेज में भारतीय प्रवासी महिलाओं पर जीआईएएन पाठ्यक्रम का शुभारंभ

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विमेंस कॉलेज में “भारतीय महिला प्रवासी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण” विषय पर पांच दिवसीय ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ अकैडमिक नेटवर्क्स (जीआईएएन) पाठ्यक्रम का आज एमएमटीटीसी ऑडिटोरियम में उद्घाटन हुआ। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रवासी भारतीय महिलाएं किस प्रकार अपनी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में योगदान देती हैं, को समझना है।
प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज, पूर्व कुलपति, एएमयू ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रवासी महिलाओं को अक्सर श्रमिक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि वास्तव में उन्होंने पीढ़ियों तक सांस्कृतिक मूल्यों को संजोने और आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने झुम्पा लाहिरी और मीरा नायर जैसी प्रवासी महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाएं अपनी विरासत की सशक्त प्रतिनिधि हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. पूर्णिमा मेहता भट्ट, प्रोफेसर एमेरिटा, हूड कॉलेज (यूएसए) ने कहा कि यह विषय उनके दिल के बहुत करीब है क्योंकि वे स्वयं भारतीय प्रवासी महिला हैं। उन्होंने कार्यशाला को ज्ञान, आत्म-खोज और संवाद की एक यात्रा बताया, जिसका उद्देश्य महिलाओं के अनुभवों को शैक्षणिक विमर्श में प्रमुखता देना है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. निशी पांडे, अंग्रेजी और आधुनिक यूरोपीय भाषाओं विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, ने एएमयू की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाएं हमेशा भाषा और संस्कृति की संरक्षक रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासन के अनुभवों से महिलाएं अपनी पहचान को फिर से परिभाषित करने को विवश होती हैं, फिर भी वे अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों को जीवित रखती हैं।
प्रारंभिक संबोधन में अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. समीना खान ने प्रवासी भारतीय महिलाओं की दृढ़ता और उनके लिए भाषा की पहचान अभिव्यक्ति में भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीआईएएन मंच शैक्षणिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोणों से ऐसे विषयों को समझने का सशक्त माध्यम है।
विमेंस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मसूद अनवर अलवी ने कहा कि जीआईएएन छात्रों को वैश्विक विद्वानों से जुड़ने और संवाद करने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पाठ्यक्रम में सक्रिय भागीदारी और जिज्ञासा बनाए रखने का आह्वान किया।
कला संकाय के डीन प्रो. टी. एन. सतीसन ने भारत की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे देश में महिला विद्वानों, कवयित्रियों और दार्शनिकों को सदा सम्मान दिया गया है। उन्होंने छात्रों से इस विरासत से प्रेरणा लेने और कार्यक्रम की सफलता की कामना की।
इससे पहले, पाठ्यक्रम समन्वयक डा सदफ फरीद ने स्वागत भाषण देते हुए पाठ्यक्रम के विषय का परिचय कराया और बताया कि प्रवासी महिलाएं अपनी मातृभूमि और देश-परदेश दोनों में सांस्कृतिक दूत की भूमिका निभाती हैं।
स्थानीय समन्वयक प्रो. एम. जे. वारसी ने जीआईएएन की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि यह कार्यक्रम भारतीय संस्थानों को वैश्विक अकादमिक नेटवर्क से जोड़ने तथा अनुसंधान और सहयोग को बढ़ावा देने का माध्यम है।
आभार ज्ञापन ऐमन फातिमा ने प्रस्तुत किया। संचालन सैयद अक्सा और मिस अनीजा अखतर ने किया।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.