हिंदी पखवाड़ा समारोह का समापन, सरल भाषा के प्रयोग और हिंदी के विस्तार पर जोर

राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति तथा हिंदी विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित हिंदी पखवाड़ा समारोह के समापन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी को सरल, सहज और व्यवहार की भाषा बनाने तथा इसे केवल कार्यालयों तक सीमित न रखने पर जोर दिया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को अतिथियों ने पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज ने कहा कि क्लिष्ट भाषा और आम बोलचाल की भाषा में काफी अंतर है। आज के समाज में जेन-जी जैसे युवाओं के प्रति संवेदनशील होने के लिए हमें सरल भाषा का प्रयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी को लोकप्रिय बनाने के लिए इसे सहज और आम लोगों की भाषा बनाना आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि हिंदी पखवाड़े के कार्यक्रमों को केवल विभाग तक सीमित न रखते हुए संकाय स्तर तक भी ले जाया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सह-कुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने कहा कि भले ही समारोह का औपचारिक रूप से समापन हो रहा है, लेकिन इसके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालय भविष्य में भी निरंतर प्रयास करता रहेगा। उन्होंने हिंदी विभाग को एक प्रोत्साहन कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया, जिससे अन्य संकायों में भी हिंदी का प्रचार-प्रसार हो सके। उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल बोलचाल में ही नहीं, बल्कि लेखन में भी किया जाना चाहिए।
कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने कहा कि हिंदी पखवाड़ा एक शुरुआत है, अंत नहीं। यह एक निरंतर प्रक्रिया है, जो हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल कार्यालयी कार्यों तक सीमित न रखते हुए दैनिक बोलचाल में भी अधिक से अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने हिंदी विभाग से वर्षभर हर सप्ताह हिंदी से संबंधित कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि हिंदी के प्रचार-प्रसार को और गति मिल सके।
कुलसचिव प्रो. आसिम जफर ने कहा कि हिंदी केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि भारत में मैकाले की शिक्षा पद्धति के तहत अंग्रेजी को पढ़ाई का माध्यम बनाया गया। हम सोचते हिंदी या अपनी मातृभाषा में हैं, लेकिन बोलते समय अंग्रेजी का प्रयोग करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि भाषा कभी बाधा नहीं बननी चाहिए और किसी भी भाषा का प्रयोग सरल एवं सहज होना चाहिए।
वित्त अधिकारी प्रो. नूरुस्सलाम ने कहा कि यह गर्व की बात है कि हिंदी विभाग ने पिछले दो सप्ताह से हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी पखवाड़ा समारोह का आयोजन किया। उन्होंने स्वरचित कविताओं के पाठ और उनके संकलन को सराहनीय पहल बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए उनकी ओर से आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन समिति के सचिव एवं हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मेराज अहमद ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ 14 सितंबर को कुलपति प्रो. नईमा खातून की उपस्थिति में हुआ था। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि पखवाड़े के दौरान आयोजित स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता में प्रस्तुत कविताओं को पुस्तक के रूप में संकलित किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न अन्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को मंच पर अतिथियों द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया।
स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता में शोधार्थी वर्ग में आकांक्षा शर्मा प्रथम, मोहम्मद आदिल द्वितीय तथा अल्पना एवं शाइस्ता सना तृतीय रहीं। स्नातकोत्तर वर्ग में ईंशाना प्रवीन प्रथम, कोमल सिंह द्वितीय और तैय्यबा सिद्दीकी तृतीय रहीं। स्नातक वर्ग में फलक रजा प्रथम, मो. अतहर शाह द्वितीय और जोहरा मुस्तफा तृतीय रहीं। विजेताओं को मुख्य अतिथि प्रो. मोहम्मद गुलरेज ने पुरस्कृत किया।
पोस्टर निर्माण एवं नारा लेखन प्रतियोगिता के शोधार्थी वर्ग में रिदा अली को विशेष पुरस्कार मिला। स्नातकोत्तर वर्ग में ईंशाना प्रवीन प्रथम, कोमल सिंह द्वितीय और मो. आलम खान तृतीय रहे। स्नातक वर्ग में पृथ्वी प्रथम, अनमोल कुमार द्वितीय और कुनाल कुमार तृतीय रहे, जबकि फौजिया खातून एवं दीपक कुमार को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। इन्हें सह-कुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने पुरस्कृत किया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के शोधार्थी वर्ग में मोहम्मद दानिश प्रथम, पवन कुमारी द्वितीय और आकांक्षा शर्मा तृतीय रहीं। स्नातकोत्तर वर्ग में मोहम्मद आलम खान प्रथम, ईंशाना प्रवीन द्वितीय और मोहम्मद फैजान तृतीय रहे। स्नातक वर्ग में नीतू यादव प्रथम, मोबाशशरा खातून द्वितीय और अंजली चैधरी तृतीय रहीं।
कर्मचारी वर्ग की आशु भाषण प्रतियोगिता में फोजैल उद्दीन तारिक प्रथम, मोहम्मद शाकिर द्वितीय तथा फहमीना नफीस एवं राहुल पारिक तृतीय रहे। इन विजेताओं को कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद रिजवान खान ने पुरस्कृत किया।
कार्यालय पत्र लेखन प्रतियोगिता के शोधार्थी वर्ग में आकांक्षा शर्मा प्रथम, मोहम्मद दानिश द्वितीय और नीतेश कुमार तृतीय रहे। स्नातकोत्तर वर्ग में मोहम्मद आलम खान प्रथम, ईंशाना प्रवीन द्वितीय और कोमल सिंह तृतीय रहीं। स्नातक वर्ग में मो. मुअज्जम खान प्रथम, मोबाशशरा खातून द्वितीय और अल्पना तृतीय रहीं। कर्मचारी वर्ग में शोभित प्रथम, संजय शर्मा द्वितीय और राहुल पारिक तृतीय रहे।
कर्मचारी वर्ग की टंकण प्रतियोगिता में मोहम्मद तारिक प्रथम, मोहम्मद शोएब इकबाल द्वितीय और सचिन कुमार तृतीय रहे। इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कुलसचिव प्रो. आसिम जफर ने पुरस्कृत किया।
निबंध लेखन प्रतियोगिता के कर्मचारी वर्ग में शोभित प्रथम, राहुल पारिक द्वितीय और संजय शर्मा तृतीय रहे। हिंदी टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता में शकेब उल्लाह खान प्रथम, देवेश अग्रवाल द्वितीय तथा साजिद अली एवं विशाल जैन तृतीय रहे। इन्हें वित्त अधिकारी प्रो. नूरुस्सलाम ने पुरस्कृत किया।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के प्रो. शम्भूनाथ तिवारी, हिंदी दिवस समन्वयक ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रेशमा ने दिया।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.