एमयू विमेंस कॉलेज में उभरती साहित्यिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए महिला लेखिका मंच शुरू

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विमेंस कॉलेज ने महिलाओं को साहित्य के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति का अवसर देने और प्रतिष्ठित लेखकों से संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से महिला लेखिका मंच शुरू किया गया है। इस अवसर पर आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम और रचनात्मक लेखन कार्यशाला में लेखक, शिक्षाविद और छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं।
मंच का उद्देश्य छात्राओं की लेखन क्षमता को निखारना, विविध विचारों से परिचित कराना और नई साहित्यिक प्रतिभाओं को अपनी बात रखने के लिए सहयोगपूर्ण वातावरण एवं मंच उपलब्ध कराना है। कॉलेज की प्राचार्या प्रो. शगुफ्ता इम्तियाज ने इस पहल का स्वागत करते हुए भाषा और साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. नाजिया हसन ने मंच की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए एक जीवंत साहित्यिक समुदाय विकसित करने की परिकल्पना साझा की।
उद्घाटन कार्यक्रम में लेखिका और स्वतंत्र पत्रकार जेहरा नकवी तथा कवि एवं उर्दू विद्वान डॉ. मुईद रशीदी ने साहित्य के माध्यम से मानवीय अनुभवों को समझने और समाज से जुड़ने के महत्व पर अपने विचार रखे। लैंगिक समानता, साहित्य, धर्म और राजनीति जैसे विषयों पर लेखन करने वाली जेहरा नकवी की पुस्तक “द रिलक्टेंट मदर: ए स्टोरी नो वन वॉन्ट्स टू टेल” भी चर्चा में रही। डॉ. रशीदी ने कविता और साहित्यिक अध्ययन पर विचार व्यक्त करते हुए लिखित शब्द की रचनात्मक संभावनाओं को रेखांकित किया।
इस अवसर पर डॉ. नाजिश बेगम की पुस्तक “कथ्य-विन्यास से शिल्प-सौंदर्य तक: कहानी प्रवाह का समीक्षात्मक पाठ” का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक ‘कहानी प्रवाह’ की साहित्यिक शिल्प-रचना और सौंदर्य पक्ष का आलोचनात्मक अध्ययन है। छात्राओं ने विभिन्न भाषाओं में कविता पाठ किया, जो मंच की बहुभाषी प्रकृति को दर्शाता है।
इसके बाद आयोजित रचनात्मक लेखन कार्यशाला में छात्राओं को लेखन की बारीकियों से परिचित कराया गया। “देखने के तरीके: लेखक एक पर्यवेक्षक और अन्वेषक के रूप में” विषय पर जेहरा नकवी ने लेखन कौशल विकसित करने और पुस्तक प्रकाशन की प्रक्रिया को समझने के व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने प्रतिभागियों को अनजाने विषयों और अनुभवों को लेखन के माध्यम से तलाशने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. मुईद रशीदी ने रचनात्मक लेखन में कल्पना की भूमिका और मौलिकता के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने रचनात्मक कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग के संदर्भ में भी विचार रखे। इन सत्रों ने छात्राओं को अपनी विशिष्ट लेखन शैली विकसित करने और साहित्य के सामने उभरती चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन मंच की सचिव मलीहा इकबाल और संयुक्त सचिव सामिया अकरम ने किया। डॉ. हुमैरा एम. अफरीदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
