दिव्या तंवर की ‘साइबर सेफ क्लासरूम’पुस्तक का विमोचन, शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर जोर; सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ द्वारा प्रकाशित
पूर्व यूजीसी अध्यक्ष प्रो. पिल्लई बोले—डिजिटल सुरक्षा पर चर्चा में पुस्तक का मानवीय दृष्टिकोण इसकी सबसे बड़ी विशेषता
डिजिटल युग में बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए ‘साइबर सेफ क्लासरूम: भारतीय शिक्षकों, अभिभावकों और उन बच्चों के लिए एक किताब, जो अभी भी बड़ों पर भरोसा करते हैं’ पुस्तक का विमोचन नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया गया। प्रो. (डॉ.) दिव्या तंवर द्वारा लिखित इस पुस्तक का प्रकाशन सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ ने किया है, जबकि पुस्तक पर चर्चा का आयोजन दिव्य फाउंडेशन ने किया।
पुस्तक विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वी. एन. राजशेखरन पिल्लई ने कहा कि ‘साइबर सेफ क्लासरूम’ भारत में डिजिटल सुरक्षा पर होने वाली चर्चा में एक महत्वपूर्ण योगदान है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका मानवीय दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए जीवन का एक आवश्यक कौशल बन चुकी है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी ब्रिगेडियर जे. पी. सिंह, वीएसएम तथा सम्मानित अतिथि के रूप में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), सीआरपीएफ के डीआईजी श्री राकेश सेठी उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के बाद पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया।

सीआरपीएफ के डीआईजी राकेश सेठी ने पुस्तक के व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल शोषण से व्यक्तियों तथा परिवारों को बचाने के लिए जागरूकता और सही निर्णय लेने की क्षमता अत्यंत आवश्यक है। ब्रिगेडियर जे. पी. सिंह ने सतर्कता, जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार और उभरते डिजिटल खतरों के प्रति जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को संदिग्ध संदेशों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग को पहचानने के लिए तैयार करना जरूरी है।
पुस्तक की लेखिका प्रो. (डॉ.) दिव्या तंवर ने डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार उपयोग का संदेश देते हुए कहा कि तकनीक से डरने के बजाय उसे समझना और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। पुस्तक स्कूलों और परिवारों में साइबर सुरक्षा को शिक्षा का नियमित हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल देती है।
चर्चा में शामिल डॉ. मनप्रीत कौर, एसोसिएट प्रोफेसर, अकाउंटिंग एंड फाइनेंस तथा एरिया चेयर, फाइनेंस, एसओआईएल स्कूल ऑफ बिजनेस डिजाइन और डॉ. अनिल सिंह, एडिटर-इन-चीफ, डेली टॉप स्टोरी ने डिजिटल साक्षरता, जागरूकता और संस्थागत जिम्मेदारी के महत्व पर अपने विचार रखे। श्री अशोक कुमार मेहता ने साइबर खतरों को पहचानने और उनसे निपटने के लिए व्यावहारिक जानकारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
बिजली क्षेत्र कौशल परिषद, नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री वी. के. सिंह की उपस्थिति में हुई चर्चा में साइबर सुरक्षा के शैक्षिक और सामाजिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। दूरदर्शन नेशनल के कार्यक्रम कार्यकारी श्री अंजय मिश्रा ने भी डिजिटल जिम्मेदारी और सुरक्षित शैक्षिक वातावरण बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा में भाग लिया।
समापन सत्र में सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के अध्यक्ष एवं पुस्तक के प्रकाशक प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि साइबर सुरक्षा को जिम्मेदार शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर बुलिंग या ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाले बच्चों को दोष देने के बजाय उनकी बात सुनना, उन्हें समझना और सहयोग देना चाहिए। बच्चों को यह विश्वास होना चाहिए कि कठिन परिस्थिति में उनके शिक्षक और अभिभावक उनकी सहायता के लिए मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि, पुस्तक का मुख्य संदेश है कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी उपायों से नहीं, बल्कि जागरूकता, जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता से सुनिश्चित की जा सकती है। यह पुस्तक शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए डिजिटल दुनिया को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक उपयोगी पहल है।

कार्यक्रम का संचालन रातिका मेहरा ने प्रभावशाली ढंग से किया। उन्होंने विभिन्न सत्रों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। आयोजन की सफलता में सीएनएमएस की डॉ. दीबा, दिव्यांश लेखी, अनुराग, सिमरन, सविता और आश्ना ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
