संवाद, सहयोग और आपसी समझ ही परस्पर जुड़ी दुनिया में संघर्षों को सुलझाने और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने की कुंजी है: लोकसभा अध्यक्ष

लोकसभा अध्यक्ष ने राष्ट्र की प्रगति को आकार देने में सिविल सेवकों और सैन्य नेतृत्व की अहम भूमिका पर जोर दिया

 

नई दिल्ली : लोकसभा अध्यक्ष  ओम बिरला ने कहा कि भारत का संविधान, समय-समय पर राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक साबित हुआ है, जिसमें निहित आदर्शों के ज़रिए लोकतांत्रिक लोकाचार और शासन को आकार दिया गया है। श्री बिरला ने ये टिप्पणियां नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज (एनडीसी) के 65वें बैच के पाठ्यक्रम सदस्यों को संबोधित करते हुए कीं। इस कार्यक्रम में भारत और 32 मित्र देशों के 124 अधिकारियों ने भाग लिया।

बिरला ने राष्ट्र की प्रगति को आकार देने में सिविल सेवकों और सैन्य नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। श्री बिरला ने उनसे भारत के विविधता वाले सामाजिक ताने-बाने को समझने और समाज के उत्थान की दिशा में काम करने के लिए अपने प्रशिक्षण और विशेषज्ञता का लाभ उठाने का आग्रह किया। श्री बिरला ने कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग की मदद से शासन में हितधारकों की क्षमता निर्माण को और बढ़ाया जा सकता है।

भारतीय संविधान को अपनाने के 75वें वर्ष पर प्रकाश डालते हुए, श्री बिरला ने तीन साल की अवधि में इस दस्तावेज को आकार देने वाले कठोर विचार-विमर्श और बहस को भी याद किया। उन्होंने संविधान सभा के सदस्यों की दूरदर्शिता और समर्पण की सराहना की, जिनकी वजह से  एक ऐसा संविधान तैयार हो पाया, जो आज भी देश के लोकतांत्रिक ढांचे का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि संविधान में परिकल्पित, भारत का संसदीय लोकतंत्र एक मजबूत, समावेशी और भारत जैसे विविधतापूर्ण राष्ट्र के लिए उपयुक्त है।

 बिरला ने प्रतिभागियों को “वसुधैव कुटुम्बकम” (विश्व एक परिवार है) के दर्शन को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने जोर देते हुए  कहा कि संवाद, सहयोग और आपसी समझ, संघर्षों को सुलझाने और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए तेजी से परस्पर जुड़ी दुनिया में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जी-20, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सहित विभिन्न वैश्विक मंचों पर भारत को एक स्थायी भविष्य के लिए विश्व नेता के रूप में स्थापित करने में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और नेतृत्व की सराहना की।

संसद सदस्यों के काम को सुविधाजनक बनाने और लोगों के व्यापक हित में की जा रही कई पहलों का ज़िक्र करते हुए, श्री बिरला ने संसदीय बहसों और ऐतिहासिक अभिलेखों को संरक्षित और सुलभ बनाने के लिए किए की जा रही डिजिटलीकरण प्रक्रिया की भी सराहना की। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि शासन को आधुनिक बनाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किस तरह प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने भारत की संसद को एक डिजिटल संगठन और सभी हितधारकों के लिए सूचना का कुशल स्रोत बनाने के लिए उठाए जा रहे विभिन्न प्रयासों का भी उल्लेख किया।

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