सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज ने संस्था में लैंगिक न्याय, बाल सुरक्षा, संस्थागत उत्कृष्टता और वित्तीय गवर्नेंस नीतियां लागू कीं
सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज ने पोश एक्ट के तहत आंतरिक समिति का गठन किया और प्रमुख संस्थागत नीतियां अपनाईं
सभापति प्रो. जसीम मोहम्मद ने सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज में गवर्नेंस सुधारों का नेतृत्व कर रहे हैं

नई दिल्ली, 23 जून, 2026: सेन्टर फॉर नमो स्टडीज़ जो एक प्रमुख सार्वजनिक नीति, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थान ने औपचारिक रूप से अपना ‘संस्थागत गवर्नेंस, नैतिकता और अनुपालन मैनुअल – 2026 संस्करण’ अपनाया है। इसके साथ ही संस्थान ने पारदर्शिता, जवाबदेही, नैतिक गवर्नेंस, लैंगिक न्याय, बाल सुरक्षा, वित्तीय ईमानदारी और संस्थागत उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज के मैनेजिंग ट्रस्टी प्रो. जसीम मोहम्मद द्वारा अनुमोदित यह मैनुअल, संगठनात्मक नीतियों का एक व्यापक ढांचा पेश करता है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार गवर्नेंस और राष्ट्रीय कानूनी व नैतिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना है। नए अपनाए गए ढांचे में यौन उत्पीड़न की रोकथाम (पोश) नीति, वित्त और वित्तीय प्रबंधन नीति, खरीद और विक्रेता प्रबंधन नीति, मानव संसाधन (एच आर) नीति, यात्रा और प्रतिपूर्ति नीति, हितों के टकराव की नीति, और बाल संरक्षण व सुरक्षा नीति शामिल हैं।
प्रो. जसीम मोहम्मद के अनुसार, इन नीतियों को अपनाना सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत वह अनुसंधान, सार्वजनिक नीति, शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित एक पेशेवर रूप से प्रबंधित, पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह संस्थान बनाना चाहता है।
‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ के अनुपालन में, नमो अध्ययन केन्द्र ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के समाधान और सुरक्षित, सम्मानजनक व समावेशी कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए अपनी आंतरिक समिति का गठन किया है। समिति के संरक्षक प्रो. जसीम मोहम्मद हैं, जबकि नई दिल्ली स्थित ‘दिव्य फाउंडेशन’ की चेयरपर्सन प्रो. दिव्या रश्मि पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य करेंगी। भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड डॉ. अनु बी. को बाहरी कानूनी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। समिति के अन्य सदस्यों में एडवोकेट नदीम वारिस खान और अलीगढ़ स्थित मीडिया सेंटर की निदेशक श्रीमती निकहत परवीन शामिल हैं। जर्नलिज़्म टुडे ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ़ श्री जावेद रहमानी; अलीगढ़ की हम संस्था की डॉ. दीबा अबरार; दिल्ली हाई कोर्ट की वकील सुश्री इस्मत चुगताई; और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विमेंस कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल प्रो. ज़किया ए. सिद्दीकी। नमो अध्ययन केन्द्र के ट्रस्टी डॉ. दौलत राम इस कमेटी के कोऑर्डिनेटर होंगे।
यह इंटरनल कमेटी शिकायतों को सुनने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने, जेंडर सेंसिटाइज़ेशन (लिंग-संवेदनशीलता) को बढ़ावा देने और पोश एक्ट के तहत कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार होगी।
इस मौके पर बोलते हुए प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि गवर्नेंस, एथिक्स और कंप्लायंस मैनुअल को अपनाना नमो अध्ययन केन्द्र के संस्थागत विकास में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह फ़्रेमवर्क संगठन को गवर्नेंस, पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और सार्वजनिक जवाबदेही के बेहतरीन तरीकों से जोड़ता है, साथ ही संस्थान की रिसर्च, शिक्षा और राष्ट्र-निर्माण की पहलों में स्टेकहोल्डर्स का भरोसा भी मज़बूत करता है।
नमो अध्ययन केन्द्र के ट्रस्टी डॉ. दौलत राम ने कहा कि बदलती कानूनी ज़रूरतों, डोनर की उम्मीदों और संगठन की ज़रूरतों के हिसाब से लगातार पालन सुनिश्चित करने के लिए इन नीतियों की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मैनुअल को अपनाने से नैतिक आचरण, ज़िम्मेदार गवर्नेंस और संस्थागत उत्कृष्टता के प्रति सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज की प्रतिबद्धता और मज़बूत होगी।
