भारतीय ज्ञान परंपरा से ही विकसित भारत और विश्वगुरु बनने का मार्ग : पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर

सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ की ‘नमो विकसित भारत संवाद’ श्रृंखला के तहत वाराणसी में इंडियन कल्चरल इनोवेशन्स कॉन्क्लेव-2026 का समापन

वाराणसी/नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ (CNMS) द्वारा आयोजित ‘नमो विकसित भारत संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत वाराणसी में आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडियन कल्चरल इनोवेशन्स कॉन्क्लेव-2026’ का अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के बुद्धा सभागार में समापन हुआ। कॉन्क्लेव में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, योग, संगीत, नाट्यशास्त्र, संस्कार तथा आधुनिक तकनीकी नवाचार के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और युवाओं ने विचार साझा किए।

समापन समारोह की मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर ने भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विकसित भारत और विश्वगुरु बनने की दिशा में भारत की ज्ञान परंपरा महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था, ज्ञान-विज्ञान और जीवन-पद्धति में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समावेश और मानवीय मूल्यों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। भारतीय संगीत और नाट्यशास्त्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये भारत की समृद्ध प्रदर्शन कला परंपरा के महत्वपूर्ण आधार हैं। भारतीय संगीत व्यक्ति के विचार और जीवन-दृष्टिकोण को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

कार्यक्रम में डॉ. गीता योगेश भट्ट ने ‘योगाचार से नवाचार’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि भारतीय शास्त्र परंपरा में चित्त और चेतना को सृजन का मूल स्रोत माना गया है। उन्होंने महर्षि पतंजलि और योगसूत्र की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि योग आज विश्व के अनेक देशों में अपनाया जा रहा है और भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक आयाम समकालीन संदर्भों में भी प्रासंगिक हैं।

सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ की ट्रस्टी प्रो. दिव्या तंवर ने दिल्ली से अपने संदेश में कहा कि ‘नमो विकसित भारत संवाद’ के माध्यम से देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में संवाद, विमर्श और ज्ञान-विनिमय के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वाराणसी का यह कार्यक्रम डॉ. अपर्णा सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय सांस्कृतिक विरासत और समकालीन नवाचार के बीच संबंधों पर विशेष चर्चा हुई।

विशिष्ट अतिथि डॉ. मोनिका मोहिनानी ने ‘गर्भाधान संस्कार’ पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कार परंपरा के सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित अनेक अवधारणाओं को आज विभिन्न स्तरों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जा रहा है।

इस अवसर पर डॉ. दिव्या सिंह, डायरेक्टर सारा (SARA), साईं इंस्टीट्यूट के अजय कुमार सिंह तथा फिल्म निर्देशक उमेश भाटिया ने भी अपने विचार रखे। अशोका इंस्टीट्यूट के चेयरमैन अंकित मौर्या ने अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ। स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन डायरेक्टर डॉ. सारिका श्रीवास्तव ने किया। संचालन असिस्टेंट प्रो. गौरव कुशवाहा एवं प्रो. हसीबउद्दीन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डीन, सीएसई, डॉ. एल.एस. मौर्या ने किया।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.