एएमयू के सर सैयद हॉल (साउथ) में “रिवायतः अलीगढ़ तहजीब का पुनर्जीवन” कार्यक्रम आयोजित

 

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सर सैयद हॉल (साउथ) में “रिवायतः अलीगढ़ तहजीब का पुनर्जीवन” विषय पर एक व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालय से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करना था।

कार्यक्रम में वक्ताओं में उर्दू विभाग के प्रोफेसर सैयद सिराजुद्दीन अजमली ने ‘रिवायत’ को एएमयू की पहचान बताने वाली एक जीवंत संस्कृति के रूप में प्रस्तुत किया, जो पूरी दुनिया में अलीग बिरादरी को साझा मूल्यों और परंपराओं के माध्यम से एकजुट करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि किसी के सलाम का जवाब ‘अस्सलामुअलैकुम’ कहकर देना, अलीगढ़ तहजीब की उस भावना को दर्शाता है जिसमें अपनापन, मेल-जोल और इंसानियत निहित है।

एएमयू के डिप्टी प्रॉक्टर प्रोफेसर सैयद अली नवाज जैदी ने सर सैयद अहमद खान की दूरदर्शी विरासत पर प्रकाश डाला, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया और ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे संस्थानों से प्रेरणा ली। उन्होंने बताया कि एएमयू किस प्रकार मुस्लिम समुदाय के लिए आशा और उन्नति का प्रतीक बना, और अलीगढ़ की अनुशासन, शिक्षा और सम्मान की परंपरा आज भी पीढ़ियों को प्रेरणा दे रही है।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत भाषण देते हुए हॉल के प्रोवोस्ट डॉ. अब्दुर रऊफ ने सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व और अलीगढ़ की परंपराओं की भूमिका को रेखांकित किया।

धन्यवाद ज्ञापन सर सैयद हॉल (साउथ) के वार्डन डॉ. कैफ फर्शोरी ने दिया। कार्यक्रम के संयोजक एवं सीनियर हॉल मोहम्मद उबैद का कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय सहयोग रहा।

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