गंगा-जमुनी तहजीब का संगम: डॉ. शम्स इक़बाल के इफ्तार में सजी इल्म-ओ-दानिश की महफिल

गंगा-जमुनी तहजीब का संगम: डॉ. शम्स इक़बाल के इफ्तार में सजी इल्म-ओ-दानिश की महफिल
नई दिल्ली: राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के निदेशक डॉ. शम्स इक़बाल के व्यक्तिगत ओर से जामिया मिलिया इस्लामिया के नेहरू गेस्ट हाउस में पवित्र रमज़ान माह में गरिमामय इफ्तार व रात्रि भोज का आयोजन किया गया जिसमें उर्दू जगत, पत्रकारिता और शैक्षिक व साहित्यिक क्षेत्रों से जुड़ी नामचीन हस्तियों की बड़ी संख्या ने शिरकत की और इस मुबारक मौके पर डॉ. शम्स इक़बाल ने रमज़ान की फज़ीलत पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह पवित्र महीना हमें धैर्य, त्याग और मानवीय सहानुभूति का संदेश देता है और विशेष रूप से रमज़ान का आखिरी अशरा अल्लाह की रहमतों और बरकतों को समेटने का खास समय है जिसमें ऐसी सभाएं आपसी प्रेम और एकता को बढ़ावा देने का माध्यम बनती हैं।
डॉ. शम्स इक़बाल ने अपने सभी शुभचिंतकों और मित्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपकी उपस्थिति ने इस महफिल की रौनक बढ़ाई है और मैं इस प्रेम के लिए हमेशा आभारी रहूंगा।

इस समारोह में ज्ञान और साहित्य जगत की ऐसी हस्तियां मौजूद थीं जिनकी उपस्थिति ने इस महफिल को एक बौद्धिक चर्चा का रूप दे दिया जिसमें प्रमुख रूप से जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलसचिव प्रोफेसर मोहम्मद माहताब आलम रिज़वी, पद्मश्री व पूर्व कुलपति प्रोफेसर अख्तरुल वासे, इंटरफेथ हारमनी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक व अध्यक्ष डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद, प्रोफेसर इरशाद नियाजी, एनसीपीयूएल के पूर्व निदेशक प्रोफेसर इर्तज़ा करीम, प्रोफेसर मोहम्मद काज़िम, प्रोफेसर मज़हर मेहंदी, प्रोफेसर शहजाद अंजुम, प्रोफेसर कौसर मज़हरी, प्रोफेसर मोहम्मद कुतुबुद्दीन, नेहरू गेस्ट हाउस के प्रभारी प्रोफेसर हुमायूँ अख्तर नजमी,

सेंटर फॉर नमो स्टडीज के अध्यक्ष प्रोफेसर जसीम मोहम्मद, इंजीनियर साजिद अली (डीजीएम एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया), रोज़नामा सायबान के ग्रुप एडिटर जावेद रहमानी, प्रमुख पत्रकार मासूम मुरादाबादी, शफीक-उल-हसन, वरिष्ठ पत्रकार खुर्शीद रब्बानी, डॉक्टर कलीमुल्लाह, इंतिखाब आलम, मोहम्मद असद, जाकिर हुसैन कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर इमरान चौधरी, ज़ुबैर सईदी, शोएब रज़ा फातिमी, शोएब रज़ा खान वारसी, अनीस आज़मी, अशरफ अली बस्तवी, खुसरो फाउंडेशन के संयोजक डॉ. हफीजुर रहमान और डॉ. जावेद हसन के नाम उल्लेखनीय हैं। इस अवसर पर रमज़ान की आध्यात्मिकता के उल्लेख के बाद विशेष प्रार्थना की गई जिसमें देश की प्रगति, शांति और व्यवस्था के लिए दुआ मांगी गई और इसके अलावा उर्दू भाषा व साहित्य के प्रचार-प्रसार और वर्तमान युग में इसके महत्व पर भी अनौपचारिक बातचीत हुई तथा सभी प्रतिभागियों ने डॉ. शम्स इक़बाल की इस म़खलिस मेजबानी की सराहना करते हुए इसे शैक्षिक और साहित्यिक हलकों के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक बेहतरीन प्रयास करार दिया।
