मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, जेएमआई ने “ग्लोबल साउथ में शहरीकरण और सतत विकास” पर छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया

मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC), जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई), नई दिल्ली ने 7 से 13 अक्टूबर 2026 तक “ग्लोबल साउथ में शहरीकरण और सतत विकास” पर छह दिवसीय ऑनलाइन शॉर्ट-टर्म मल्टीडिसिप्लिनरी प्रोग्राम (STP) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम में भारत के 22 राज्यों से लगभग 108 फैकल्टी सदस्यों और शोधकर्ताओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। ये प्रतिभागी विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, प्रबंधन, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, डिज़ाइन और प्लानिंग जैसे विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों से जुड़े थे।

यह कार्यक्रम जेएमआई के माननीय कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ और जेएमआई के रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी के संरक्षण में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का स्वरूप MMTTC की निदेशक प्रो. कुलविंदर कौर और जेएमआई के आर्किटेक्चर विभाग के प्रो. निसार खान (जो इस कार्यक्रम के समन्वयक भी थे) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार और डिज़ाइन किया गया था।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत मुख्य भाषण के साथ हुई, जिसे बैंकॉक, थाईलैंड की थम्मासैट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ ग्लोबल स्टडीज़ में ‘सतत विकास और नवाचार अनुसंधान केंद्र’ के निदेशक; दक्षिण अफ्रीका की स्टेलेनबॉश यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ पब्लिक लीडरशिप में ‘एक्स्ट्राऑर्डिनरी प्रोफेसर’; और सियोल, कोरिया गणराज्य की ‘अर्बन यूथ एकेडमी’ में ‘विशिष्ट प्रोफेसर’ प्रो. भरत दहिया ने दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (U.N.) जैसे संगठनों के साथ अपने तीन दशकों के वैश्विक अनुभव और कार्यप्रणाली के आधार पर, ग्लोबल साउथ के शहरों में तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के रुझानों और दीर्घकालिक सतत विकास के बीच महत्वपूर्ण अंतर्संबंधों पर ज़ोर देते हुए कार्यक्रम की पृष्ठभूमि तैयार की। उन्होंने शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए संदर्भ-विशिष्ट और स्थानीय स्तर पर अनुकूलित रूपरेखाओं की आवश्यकता पर बल दिया। छह दिनों तक, यूनिवर्सिटी, रिसर्च संस्थानों, सरकारी निकायों और प्रोफेशनल संगठनों के विशेषज्ञों ने शहरी सस्टेनेबिलिटी के कई पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। इन सेशन में शहरी प्लानिंग और डिज़ाइन, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, आवास, गवर्नेंस, पब्लिक हेल्थ, शहरी फाइनेंस और शहरी बदलाव के सामाजिक असर जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

वक्ताओं में, जेएमआई के प्लानिंग डिपार्टमेंट की प्रोफ़ेसर हिना ज़िया ने सस्टेनेबल शहरों पर बात की, जबकि सिएटल की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के डॉ. मनीष चालना ने भारत और USA में सस्टेनेबल शहरी डिज़ाइन के अलग-अलग केस स्टडीज़ पर चर्चा की। जेएमआई के भूगोल विभाग के प्रोफ़ेसर हारून सज्जाद ने प्राकृतिक आपदाओं के लिए अनुकूलन और बचाव की रणनीतियों पर चर्चा की।

इस प्रोग्राम में क्लाइमेट लिटरेसी, पहाड़ी इलाकों में छोटे शहरों के विकास और ग्लोबल साउथ में शहरीकरण के बदलते पैटर्न पर भी चर्चा की गई। प्रोफ़ेसर मैनाक ने क्लाइमेट लिटरेसी और अडैप्टिव इंटेलिजेंस पर बात की, जबकि स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA), दिल्ली की डॉ. चेतना सिंह ने भारत के पहाड़ी इलाकों में छोटे शहरों के विकास में सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की, जिसमें जम्मू-कश्मीर का खास ज़िक्र था। जेएमआई के भूगोल विभाग की प्रोफ़ेसर तरुणा बंसल ने शहरीकरण के पश्चिमी मॉडल और ग्लोबल साउथ के अनुभवों के लिए उनकी प्रासंगिकता के बारे में बताया। सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के डॉ. रजनीश सरीन ने शहरी रेसिलियेंस और शहरी कूलिंग फ़्रेमवर्क के बारे में जानकारी दी।

वायु प्रदूषण, शहरी अर्थव्यवस्था और गवर्नेंस चर्चा के अन्य महत्वपूर्ण विषय थे। जेएमआई के राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. सुचरिता सेनगुप्ता ने दिल्ली के वायु प्रदूषण से जुड़ी राजनीति और सार्वजनिक चर्चा पर बात की। CRRID, चंडीगढ़ के डॉ. मनोज कुमार तेओटिया ने उत्तर-पश्चिम भारत में हाशिए पर रहने वाले समुदायों पर शहरीकरण के प्रभावों पर चर्चा की, जिसमें खास तौर पर चंडीगढ़ शहर पर ध्यान दिया गया। TERI के डॉ. शरीफ़ कमर ने सामाजिक-आर्थिक सस्टेनेबिलिटी और गवर्नेंस पर ध्यान केंद्रित किया। सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वित्तीय पहलुओं पर डेलॉइट के विकास चंद्र ने बात की, जिन्होंने सस्टेनेबिलिटी के लिए फ़ाइनेंसिंग और इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स के लिए फ़ंडिंग के बारे में बताया। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ अर्बन अफ़ेयर्स (NIUA) की डायरेक्टर प्रोफ़ेसर देबोलिना कुंडू ने भारत में शहरी विकास को आकार देने वाली व्यापक शहरी नीति और संस्थागत ढांचे के बारे में जानकारी दी।

प्रोग्राम के दौरान आवास और शहरीकरण के सामाजिक पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उदाहरण के लिए, SPA दिल्ली की डॉ. रुचिता गुप्ता ने भारत के हाउसिंग सेक्टर में सामाजिक-आर्थिक स्थिरता पर चर्चा की, जबकि जेएमआई के सोशल वर्क डिपार्टमेंट के हेड प्रो. आर. आर. पाटिल ने शहरी विकास के सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर अपने विचार रखे। सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी की प्रो. श्रुति तांबे ने स्मार्ट शहरों के जेंडर-संबंधी पहलुओं पर प्रकाश डाला।

कुछ अन्य विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, इनक्ल्युसिव सैनिटेशन, सार्वजनिक जगहों के डिज़ाइन और पानी व शहरीकरण के बीच संबंध जैसे मुद्दों पर बात की। उदाहरण के लिए, NIUA के प्रोग्राम लीड श्री अंशुल अब्बासी ने जलवायु परिवर्तन पर बात की, जबकि NIUA की टीम लीड डॉ. महरीन मट्टो ने पूरे शहर में सबके लिए सैनिटेशन पर चर्चा की। डॉ. अक्षय कौल ने “अराजकता से उम्मीद की ओर: सार्वजनिक क्षेत्र में सतत विकास” पर लेक्चर दिया, जबकि जर्मनी की ओल्डेनबर्ग यूनिवर्सिटी की डॉ. मानसी बाल भार्गव ने पानी, शहरीकरण और स्थिरता के बीच संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया।

एक्सपर्ट सेशन के साथ-साथ, प्रतिभागियों ने कोर्स से जुड़े अलग-अलग विषयों पर ग्रुप प्रेजेंटेशन दिए और अपने विचार साझा किए। मूल्यांकन के हिस्से के तौर पर एक MCQ टेस्ट भी लिया गया। कार्यक्रम का समापन पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के समाजशास्त्र के पूर्व डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर, प्रो. एस. एल. शर्मा के समापन भाषण के साथ हुआ। समाजशास्त्रीय नज़रिए से बात करते हुए, उन्होंने फिर से कहा कि शहरीकरण का सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) और ‘ग्लोबल नॉर्थ’ व ‘ग्लोबल साउथ’ दोनों से नकारात्मक संबंध है। प्रो. शर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अगर ‘ग्लोबल साउथ’ को सस्टेनेबल शहरीकरण हासिल करना है, तो मानवीय मूल्यों, सामाजिक न्याय, नैतिकता और ईमानदारी के आधार पर सस्टेनेबिलिटी के नज़रिए को फिर से परिभाषित करने की ज़रूरत है।

पूरे कोर्स के दौरान प्रो. निसार खान और प्रो. कुलविंदर कौर लगातार प्रतिभागियों और रिसोर्स पर्सन के साथ जुड़े रहे। उन्होंने शहरीकरण और सस्टेनेबिलिटी के अध्ययन में मल्टीडिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) दृष्टिकोण की ज़रूरत पर खास तौर पर ज़ोर दिया, जो उनके द्वारा कार्यक्रम को डिज़ाइन करने और रिसोर्स पर्सन को चुनने के तरीके से साफ़ झलकता था। प्रतिभागियों ने भी कार्यक्रम के सफल आयोजन पर अपना बहुत-बहुत आभार, प्रशंसा और संतुष्टि ज़ाहिर की। कार्यक्रम का समापन MMTTC, जेएमआई के श्री अमीरउल्लाह सिद्दीकी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.