जामिया मिल्लिया इस्लामिया में UPSC मेला 2.0: यूनिवर्सिटी ने प्रतियोगी उत्कृष्टता, समान अवसर और सार्वजनिक सेवाओं तक दिव्यांगों की समावेशी पहुँच के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) ने पिछले सप्ताह UPSC मेला 2.0 का आयोजन किया। यह छात्रों पर केंद्रित एक बड़ी पहल थी, जिसका मकसद यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाना, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जानकारी की कमी को दूर करना और इच्छुक उम्मीदवारों को सफल सिविल सेवा उम्मीदवारों और अनुभवी प्रशासकों से सीधे जुड़ने का मौका देना था।

डॉ. एम. ए. अंसारी ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली व अन्य शहरों के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लगभग 1,150 छात्रों और सिविल सेवा के इच्छुक उम्मीदवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम ने इच्छुक उम्मीदवारों, सफल UPSC उम्मीदवारों और पूर्व वरिष्ठ सिविल सेवकों को मेंटरशिप, नॉलेज-शेयरिंग, करियर मार्गदर्शन और सार्थक बातचीत के लिए एक साझा मंच पर इकट्ठा किया।

इस कार्यक्रम का आयोजन जामिया UPSC सोसाइटी ने किया था, जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) के पूर्व छात्रों की एक पहल है। इसे जामिया मिल्लिया इस्लामिया के दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिकायत निवारण अधिकारी के कार्यालय के सहयोग से और BANO IAS इंस्टीट्यूट के प्रायोजन समर्थन से आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र कुरान की आयतों के पाठ और उसके बाद जामिया तराना के गायन के साथ हुई, जो यूनिवर्सिटी की परंपराओं के अनुरूप था।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए नोडल और शिकायत निवारण अधिकारी डॉ. मो. फैजुल्लाह खान ने विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में, उन्होंने छात्रों, विशेषकर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक अनुकूल, सुलभ और समावेशी माहौल बनाने के प्रति जामिया की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संस्थागत समर्थन यूनिवर्सिटी परिसर से आगे तक फैला होना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्रों को विश्वसनीय जानकारी, उचित मार्गदर्शन और समान अवसर मिल सकें।

इस कार्यक्रम में जामिया मिलिया इस्लामिया के वाइस-चांसलर प्रो. मज़हर आसिफ़ शामिल हुए। उन्होंने सभा को संबोधित किया और छात्रों को लगन, दृढ़ता, अनुशासन और समाज व देश के प्रति ज़िम्मेदारी की मज़बूत भावना के साथ अपने लक्ष्यों को पाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके संबोधन में शिक्षा, दृढ़ संकल्प और सही जानकारी के साथ की गई तैयारी के महत्व पर ज़ोर दिया गया, ताकि युवा देश-निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें।

UPSC मेला 2.0 का एक मुख्य आकर्षण UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफल उम्मीदवारों के साथ एक इंटरैक्टिव सेशन था। इसमें शामिल प्रमुख उम्मीदवारों में जयंत गर्ग (AIR 64), ध्वनिश पोलावरपु (AIR 108), शादाब अली खान (AIR 415), शाहरुख खान (AIR 575), मो. इरफ़ान कायमखानी (AIR 646), मो. अबूज़र अंसारी (AIR 671), मुस्कान वर्मा (AIR 771) और स्नेहा यादव (AIR 782) शामिल थे। UPSC CSE 2024 के सफल उम्मीदवार अरुण रंभा ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

उम्मीदवारों ने अपनी तैयारी के सफ़र, व्यक्तिगत अनुभवों, चुनौतियों और सिविल सेवा परीक्षा के विभिन्न चरणों को पार करने की रणनीतियों के बारे में बताया। उनकी बातों में पढ़ाई की योजना, समय प्रबंधन, निरंतरता, उत्तर-लेखन की रणनीतियां, मुश्किलों का सामना करना और तैयारी की कठिन प्रक्रिया के दौरान मोटिवेशन बनाए रखना जैसे विषय शामिल थे।

एक और मुख्य आकर्षण “द बिग बॉसेस”टाउन हॉल था, जिसमें श्री जलज श्रीवास्तव, IAS (रिटायर्ड), 1984 बैच और सुश्री मंजू सेठ, IFS (रिटायर्ड), 1983 बैच शामिल हुए।

अपने व्यापक पेशेवर अनुभव के आधार पर, इन प्रतिष्ठित पूर्व सिविल सेवकों ने छात्रों के साथ लोक प्रशासन, गवर्नेंस, नेतृत्व, नैतिक ज़िम्मेदारियों और लोक सेवा की बदलती चुनौतियों पर चर्चा की। इस सेशन में सरकारी संस्थानों के कामकाज, प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया और सिविल सेवाओं के माध्यम से देश की सेवा करने से जुड़ी ज़िम्मेदारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

UPSC मेला 2.0 में सिविल सेवा की तैयारी करने वालों के लिए एक संस्थागत मंच प्रदान करने में जामिया मिलिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) के योगदान पर भी प्रकाश डाला गया।

RCA के पूर्व छात्रों की पहल, ‘जामिया UPSC सोसाइटी’, सफल उम्मीदवारों और पहले तैयारी कर चुके लोगों की उस लगातार भागीदारी को दिखाती है जिसके ज़रिए वे छात्रों की अगली पीढ़ी की मदद करते हैं। अपने निजी अनुभव, तैयारी की रणनीतियां और व्यावहारिक जानकारी साझा करके, पूर्व छात्रों की ये पहल यूनिवर्सिटी के अंदर और बाहर मेंटरशिप और साथियों से सीखने (पीयर लर्निंग) के कल्चर को मज़बूत करने में मदद करती हैं।

इस कार्यक्रम ने दिखाया कि कैसे यूनिवर्सिटी का एकेडमिक इकोसिस्टम, कोचिंग की पहल और पूर्व छात्रों का नेटवर्क मिलकर काम कर सकते हैं ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गाइडेंस तक पहुँच बढ़ाई जा सके और अलग-अलग शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड वाले छात्रों को प्रतिष्ठित पब्लिक सर्विस में जाने के लिए प्रेरित किया जा सके।

UPSC मेला 2.0 की एक खास बात यह थी कि यह जामिया मिलिया इस्लामिया में ‘दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिकायत निवारण अधिकारी’ के कार्यालय से जुड़ा था। इससे यह बात सामने आई कि प्रतियोगी परीक्षाओं के मौके दिव्यांग छात्रों के लिए भी उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करना कितना ज़रूरी है। यह कार्यालय जागरूकता बढ़ाने, दिव्यांगता से जुड़ी शिकायतों को दूर करने और यूनिवर्सिटी के अंदर पहुँच (एक्सेसिबिलिटी), समान अवसर और दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े नियमों को लागू करने में मदद करने का काम करता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर हो रही व्यापक बातचीत में दिव्यांगता को शामिल करके, इस कार्यक्रम ने इस सिद्धांत को और मज़बूत किया कि समान अवसर के लिए न केवल शिक्षा तक पहुँच ज़रूरी है, बल्कि जानकारी, मेंटरशिप, पहुँच के उपाय और पेशेवर जीवन में निष्पक्ष भागीदारी भी ज़रूरी है।

एकेडमिक और मोटिवेशनल सेशन के अलावा, कार्यक्रम में संगीत, नृत्य और UPSC-थीम वाले नाटक जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल थे।

रेसिडेंशियल कोचिंग एकेडमी, जामिया UPSC सोसाइटी और जामिया मिलिया इस्लामिया में ‘दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिकायत निवारण अधिकारी’ के कार्यालय के मिले-जुले योगदान से, यूनिवर्सिटी ने प्रतिभा को निखारने, प्रतियोगी उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और पब्लिक सर्विस में अवसरों तक समान पहुँच बढ़ाने के अपने संकल्प को फिर से दोहराया।

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