जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ारसी विभाग ने हाफ़िज़ शिराज़ी स्मृति समारोह का किया आयोजन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ारसी विभाग ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को विभाग के ईरानोलॉजी हॉल में मशहूर फ़ारसी कवि हाफ़िज़ शिराज़ी के सम्मान में एक स्मृति समारोह आयोजित किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के कल्चर हाउस के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में फ़ारसी साहित्य के इतिहास की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक को श्रद्धांजलि देने के लिए जाने-माने शिक्षाविद, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्कॉलर्स, फैकल्टी सदस्य और छात्र शामिल हुए। समारोह में हाफ़िज़ की शायरी के सदाबहार महत्व और फ़ारसी भाषी दुनिया की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं में उनके योगदान पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. यासिर अब्बास द्वारा पवित्र क़ुरान के पाठ से हुई, जिसके बाद फ़ारसी विभाग के एम.ए. (सेमेस्टर-III) के छात्र श्री शम्स ताबिश ने ‘नात शरीफ़’ प्रस्तुत की। इन शुरुआती कार्यक्रमों ने स्मृति सभा के लिए एक गरिमापूर्ण और गंभीर माहौल तैयार किया।

स्वागत भाषण जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ारसी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहसिन अली ने दिया, जिन्होंने विशिष्ट अतिथियों, फैकल्टी सदस्यों, विद्वानों और छात्रों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने हाफ़िज़ शिराज़ी की साहित्यिक विरासत की निरंतर प्रासंगिकता और सांस्कृतिक समझ, बौद्धिक जिज्ञासा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में फ़ारसी साहित्य के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ारसी विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. अब्दुल हलीम ने इस अवसर पर अपने विद्वतापूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने हाफ़िज़ की शायरी में मौजूद साकी, शराब आदि जैसे प्रतीकों के माध्यम से हाफ़िज़ की ग़ज़लों के विभिन्न पहलुओं- जैसे नशा, प्रेम और मानवता- पर विस्तार से चर्चा की। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मानविकी एवं भाषा संकाय के डीन, प्रोफ़ेसर इक़्तिदार मोहम्मद ख़ान इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने इस्लामिक स्टडीज़ के क्षेत्र में फ़ारसी लोगों के अहम योगदान पर ज़ोर दिया और कहा कि ईरानियों ने धर्म और साहित्य के क्षेत्र में बहुमूल्य सेवाएँ दी हैं।

इस समारोह का एक मुख्य आकर्षण मुख्य अतिथि, नई दिल्ली में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के कल्चर हाउस के कल्चरल काउंसलर, डॉ. फ़रीदुद्दीन फ़रीद अस्र का संबोधन था। उनकी मौजूदगी ने भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक और साहित्यिक संबंधों को रेखांकित किया, खासकर भारतीय उपमहाद्वीप में साहित्य, विद्वता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भाषा के तौर पर फ़ारसी के ऐतिहासिक महत्व को। उन्होंने फ़ारसी के विद्वानों और छात्रों को सलाह दी कि अगर वे जीवन में बड़ी ऊँचाइयाँ हासिल करना चाहते हैं, तो उन्हें हाफ़िज़ के अध्ययन में रुचि लेनी चाहिए।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के माननीय वाइस-चांसलर प्रोफ़ेसर मज़हर आसिफ़ ने अध्यक्षीय भाषण दिया। उनका संबोधन समारोह का एक अहम हिस्सा था, जिसमें उन्होंने साहित्यिक विरासत, अकादमिक जुड़ाव और फ़ारसी साहित्य में निहित मानवीय मूल्यों के महत्व को दोहराया। उन्होंने अपने विद्वतापूर्ण भाषण से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और फ़ारसी ग़ज़लों के विकासक्रम को सरल लेकिन समझने योग्य ढंग से समझाया। माननीय वाइस-चांसलर की भागीदारी ने इस अवसर की गरिमा बढ़ाई।

कार्यक्रम के समापन सत्र में फ़ारसी विभाग के छात्रों द्वारा ग़ज़ल गायन और हाफ़िज़ शिराज़ी पर भाषण प्रस्तुत किए गए। सुश्री नरगिस ज़ेहरा, सुश्री हीरा ज़ेबा और श्री फ़ैज़ान अशरफ़ ने हाफ़िज़ की ग़ज़लों की अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का समापन जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के फ़ारसी विभाग के फ़ैकल्टी सदस्य प्रोफ़ेसर सैयद कलीम असग़र द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यक्रम का संचालन फ़ारसी विभाग के फ़ैकल्टी सदस्य और सब्जेक्ट एसोसिएशन के सलाहकार डॉ. मो. अरशदुल क़ादरी ने किया।

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