‘इतिहासलेखन का विऔपनिवेशीकरण’ विषय पर अकादमिक विमर्श!

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कल्चरल एजुकेशन सेंटर(CEC) की ओर से Decolonizing the Indian History (भारतीय इतिहास का विऔपनिवेशीकरण) विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में सम्मिलित होने का अवसर मिला! चर्चा-परिचर्चा का मूलभाव यह था-
भारतीय इतिहास के संदर्भ में ‘इतिहास का विऔपनिवेशीकरण’ (Decolonizing History) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और समसामयिक अकादमिक विमर्श है। यह केवल इतिहास को फिर से लिखने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उन औपनिवेशिक दृष्टिकोणों, पूर्वाग्रहों और ज्ञान-मीमांसा (Epistemology) को चुनौती देने का उपक्रम है, जिन्होंने दशकों तक भारतीय इतिहास की व्याख्या को सीमित रखा है।
इतिहास का विऔपनिवेशीकरण कोई ‘अतीत का महिमामंडन’ नहीं, बल्कि ‘इतिहास की दृष्टि का शुद्धिकरण’ है। औपनिवेशिक इतिहासकारों (जैसे जेम्स मिल, विन्सेंट स्मिथ) ने भारत के इतिहास को ‘सभ्यताहीन’, ‘अंधकारमय’ या केवल ‘विदेशी आक्रमणों का इतिहास’ के रूप में चित्रित किया। विऔपनिवेशीकरण का अर्थ है—औपनिवेशिक चश्मे को उतारकर भारतीय समाज, संस्कृति और विकास के आंतरिक तंत्र को समझना।
इतिहास का विऔपनिवेशीकरण एक निरंतर चलने वाली बौद्धिक प्रक्रिया है। जब हम भारतीय इतिहास को वैश्विक संदर्भ में, लेकिन भारतीय दृष्टिकोण से देखते हैं, तो हम न केवल अपने पूर्वजों के प्रति न्याय करते हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक अधिक आत्मविश्वासी और संतुलित राष्ट्र का निर्माण करते हैं। इतिहास के पुन:पाठ का अर्थ पुराने पन्नों को जलाना नहीं, बल्कि उन पर जमी धूल हटाकर छिपे हुए सत्य को उजागर करना है।
कला संकाय के डीन एवं सीईसी के समन्वयक प्रो. मोहम्मद रिज़वान ख़ान के सक्रिय प्रयासों से आयोजित पैनल चर्चा में प्रो. अर्शी ख़ान, प्रो. मोहिबुल हक़ ( राजनीतिविज्ञान विभाग), प्रो. परवेज़ नज़ीर, प्रो. एमके पुंडीर, प्रो. एम. वसीम राजा, प्रो. सैयद अली काज़मी( इतिहास विभाग), प्रो. विभा शर्मा( अँगरेज़ी विभाग), प्रो. शंभुनाथ तिवारी( हिंदी विभाग) प्रमुख रूप से सम्मिलित थे!
