जामिया मिल्लिया इस्लामिया में ‘असम के चाय बागानों में स्किलिंग इनिशिएटिव्स’ पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का उद्घाटन

“अंडरस्टेंडिंग फील्ड एक्सेस एंड स्किलिंग इनिशिएटिव्स इन असम’स टी गार्डन्स एंड शेयरिंग/ डिस्कशन ऑन प्रेलिमिनरी फाइंडिंगस एंड मेथडोलोजी” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का उद्घाटन 28 सितंबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के मीर अनीस हॉल में किया गया। ICSSR के “डिजिटल और गैर-डिजिटल कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से असम की चाय जनजातियों का सशक्तिकरण” नामक लॉन्गिट्यूडिनल रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत आयोजित यह पहल असम के डिब्रूगढ़ और लखीमपुर जिलों के चाय-बागान समुदायों पर केंद्रित है। इसमें फील्ड एक्सेस, चाय बागानों की मैपिंग, मौजूदा कौशल विकास पहलों की जांच और उपयुक्त प्रशिक्षण कार्यप्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत मो. इंज़मामुल हक द्वारा ‘किरात’ (कुरान पाठ) से हुई। प्रो. कौशल किशोर ने विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और सम्मान व आतिथ्य के प्रतीक के रूप में पारंपरिक असमिया जनजातीय ‘गमोचा’ भेंट किया। इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद थीं, जिनमें तिरुवनंतपुरम (केरल) स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज में मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स चेयर के प्रो. विनोज़ अब्राहम शामिल थे। उन्होंने मुख्य भाषण दिया और कौशल विकास, आजीविका तथा सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर बहुमूल्य विचार साझा किए। असम सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. एम. अरिज़ विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने चाय-बागान समुदायों तथा उनकी आजीविका संबंधी जरूरतों के साथ अनुसंधान के जुड़ाव के महत्व पर जोर दिया।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति ने अध्यक्षीय संबोधन दिया और इस पहल के महत्व को रेखांकित किया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शिक्षा संकाय की डीन प्रो. अनीता रस्तोगी ने भी सभा को संबोधित किया और शैक्षणिक दृष्टिकोण, फील्ड के अनुभवों तथा अनुसंधान-आधारित समझ को एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया। प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. काज़ी फ़िरदौसी इस्लाम ने रिसर्च प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी और इस मीटिंग के आयोजन के मकसद के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने काम करने के तरीके (मेथडोलॉजी) को बेहतर बनाने और स्किलिंग के सही मौकों की पहचान करने में बातचीत और सलाह-मशविरे के महत्व पर ज़ोर दिया।
प्रोजेक्ट टीम में डॉ. काज़ी फ़िरदौसी इस्लाम प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर के तौर पर और प्रो. कौशल किशोर, प्रो. अहरार हुसैन, प्रो. निवेदिता गोस्वामी, डॉ. समीर बाबू और डॉ. ज़ेबा तबस्सुम प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर शामिल हैं। प्रोजेक्ट की साइट्स असम के चाय बागानों में, खासकर डिब्रूगढ़ और लखीमपुर ज़िलों में हैं। इन चर्चाओं का मकसद चाय बागान साइट्स की मैपिंग और चयन में मदद करना है, साथ ही मुख्य स्टडी के लिए फील्ड तक पहुँचने की रणनीतियों और ट्रेनिंग के तरीकों को मज़बूत करना है।
इस कार्यक्रम में पूरे भारत से शिक्षाविदों, प्रोफेशनल्स, इंडस्ट्री लीडर्स, फील्ड एक्सपर्ट्स और प्रैक्टिशनर्स की भागीदारी से और भी ज़्यादा अहमियत मिली। इनमें डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी (असम), गुवाहाटी यूनिवर्सिटी (असम), OKD इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल चेंज एंड डेवलपमेंट (OKDISCD), चाय बागानों और ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले जाने-माने NGO, सिक्किम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया के एक्सपर्ट्स शामिल थे।
उद्घाटन कार्यक्रम का समापन प्रो. अहरार हुसैन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने गणमान्य व्यक्तियों, मेहमानों, प्रोजेक्ट टीम के सदस्यों और प्रतिभागियों का उनकी मौजूदगी और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ। उद्घाटन कार्यक्रम ने असम के चाय बागान समुदायों से जुड़ी फील्ड तक पहुँच, स्किलिंग पहल और रिसर्च मेथडोलॉजी पर एकेडमिक सलाह-मशविरा और आपसी चर्चा की नींव रखी।
