एएमयू के फाइन आर्ट्स विभाग में प्रायोगिक प्रदर्शनी ‘ए वर्ल्ड इन पासिंग’ आयोजित की
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग में सूफी यजदानी द्वारा क्यूरेट की गई प्रायोगिक प्रदर्शनी ‘ए वर्ल्ड इन पासिंग’ आयोजित की गई। प्रदर्शनी में विभिन्न इंस्टॉलेशन, पेंटिंग और फोटोग्राफिक कृतियों के माध्यम से धीमेपन, ध्यान और क्षणभंगुरता से जुड़े आपस में जुड़े विषयों को प्रस्तुत किया गया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन फाइन आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. आबिद हादी और विभागीय शिक्षकों की उपस्थिति में हुआ। डॉ. हादी ने छात्रों के सामूहिक प्रयासों और प्रदर्शनी में दिखाई गई रचनात्मक सोच की सराहना की। बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिससे वहां कला के प्रति रुचि और संवाद का माहौल बना।
तैय्यब हुसैन, सनोबर निहाल, मेहविश नाज, अबू नोमान, नूरजहां करीम, अफरीदा परवीन और हिना कुमारी की संयुक्त इंस्टॉलेशन ‘हिप्पोकैम्पस’ में संस्थागत स्मृति को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। इस कृति का केंद्र यह विचार था कि कला की शुरुआत किसी चीज को ध्यानपूर्वक देखने और महसूस करने जैसे सरल कार्य से हो सकती है।
रेहान आरिफ की इंस्टॉलेशन में रोजमर्रा की वस्तुओं से जुड़ी व्यक्तिगत स्मृतियों को प्रस्तुत किया गया। दर्शकों को स्टिकी नोट्स पर अपने विचार लिखने के लिए आमंत्रित किया गया, जिससे व्यक्तिगत चिंतन इस कृति का निरंतर विकसित होने वाला हिस्सा बन गया।
प्रांगण में हारिस रजा अशरफ ने पुआल और बांस से बनाए गए मांस की दुकान के एक प्रतिरूप के साथ चमगादड़, मुर्गी और मछली के मांस को दर्शाती पेंटिंग्स प्रस्तुत कीं। लाल रंग के प्रमुख इस्तेमाल ने इस कृति के दृश्य प्रभाव को और तीव्र बनाया।
हबीबा आरिफ की एक इंस्टॉलेशन में जंगल में अकेली कुर्सियों की पेंटिंग को विभाग से प्राप्त पुरानी और अनुपयोगी कुर्सियों के साथ संयोजित किया गया। इस कृति में अनुपस्थिति, उपयोगिता और उपेक्षित स्थानों से जुड़े विचारों को प्रस्तुत किया गया।
गलियारे में हबीबा आरिफ और अरीब आफताब ने संयुक्त और व्यक्तिगत कृतियां प्रदर्शित कीं। इनमें नीले रंग की तलाश में परिसर में की गई सैर के दौरान खींची गई एएमयू परिसर की तस्वीरें भी शामिल थीं। एक अन्य संयुक्त कृति में तीन सामान्य प्रश्नों के प्रति दोनों कलाकारों की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं को विपरीत दृष्टिकोण दर्शाने वाले रेखाचित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया।
सीढ़ियों पर मदिहा इमरान की पेंटिंग्स में एक दीवार के दृष्टिकोण से दिन के गुजरने का अवलोकन किया गया। इनमें बदलती रोशनी, उपस्थिति और अनुपस्थिति को दर्शाया गया। ऊपरी मंजिल पर सोनी सरस्वत की ‘द फेमिलियर सरफेस’ नामक कृतियों की श्रृंखला में सामान्य वस्तुओं और उनसे जुड़ी व्यक्तिगत स्मृतियों को प्रस्तुत किया गया, जिसमें हरा रंग बार-बार दिखाई देने वाला प्रमुख दृश्य तत्व रहा।
