यूजीसी एमएमटीटीसी ने साहित्यिक गोष्ठी के साथ मनाया हिंदी पखवाड़ा

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथाकार एवं पूर्व आईआरएस अधिकारी एस.एम. अशरफ ने अपनी चर्चित कहानी ‘लकड़बग्घा चुप हो गया’ का पाठ किया।
कार्यक्रम में यूजीसी एमएमटीटीसी के चार सप्ताह के शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम में देशभर से ऑनलाइन जुड़े 118 विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकों ने भाग लिया। वहीं, शिक्षक शिक्षा विषय में दो सप्ताह के पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से शामिल 36 शिक्षकों ने केंद्र में उपस्थित होकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का स्वागत करते हुए यूजीसी एमएमटीटीसी की निदेशक डॉ. फायज़ा अब्बासी ने कहानी-कथन को प्रभावी शिक्षण पद्धति बताते हुए कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल जानकारी प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में विविध मानवीय अनुभवों के प्रति समझ और संवेदनशीलता विकसित करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है।
कहानी पाठ से पूर्व एस.एम. अशरफ ने कहानी की मूल अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह रचना मनुष्य के भीतर मौजूद पशु प्रवृत्तियों और पशु चरित्रों तथा मानव व्यवहार के पीछे छिपे मनोवैज्ञानिक पक्षों की पड़ताल करती है। उन्होंने बताया कि यह कहानी ‘लकड़बग्घा हंसा, लकड़बग्घा रोया, लकड़बग्घा चुप हो गया’ का हिस्सा है, जिसमें लकड़बग्घे की हंसी, पीड़ा और खामोशी को मानव जीवन की विभिन्न स्थितियों के रूपक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कहानी पाठ के बाद चर्चा का संचालन हिंदी विभाग के अजय बिसारिया ने किया। उन्होंने कहा कि हिंदी और उर्दू का ऐतिहासिक विकास साथ-साथ हुआ है और दोनों भाषाओं ने भारतीय समन्वित संस्कृति के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में समाज के अनुभवों एवं सरोकारों को अभिव्यक्त किया है।
शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. अब्दुल रहीम किदवई ने कहा कि यूजीसी एमएमटीटीसी अपने विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल शिक्षकों के समग्र सीखने के अनुभव को समृद्ध करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने शिक्षण समुदाय के बीच साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की एएमयू की दीर्घकालिक परंपरा का भी उल्लेख किया।
शिक्षा विभाग की प्रो. नसरीन मुजीब, जो शिक्षक शिक्षा विषय के पुनश्चर्या पाठ्यक्रम की पाठ्यक्रम समन्वयक भी हैं, ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन उर्दू अकादमी के डॉ. मुश्ताक सदफ ने किया।
