अनुसंधान, संवाद और राष्ट्र निर्माण की विकसित भारत यात्रा के दस वर्ष पूरे, नई दिशा में बढ़ा सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज
नमो केन्द्र के दस वर्ष के अनुसंधान के यात्रा में सरकारी तंत्र के असहयोग से हुई निराशा , सरकार को स्वयं सेवी संस्थानों को जोड़ना चाहिए

नई दिल्ली, 22 सितंबर। सेन्टर फॉर नमो स्टडीज (नमो अध्ययन केन्द्र) ने अनुसंधान, संवाद और जनसरोकार से जुड़ी अपनी यात्रा के दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। सितंबर 2016 में शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य भारत के बदलते विकास परिदृश्य का अध्ययन करने तथा ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ से जुड़े विचारों एवं विमर्श को व्यापक अकादमिक मंच उपलब्ध कराना रहा है। वर्ष 2021 में सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज का औपचारिक पंजीकरण हुआ, जिससे पिछले वर्षों से चल रहे कार्य को संस्थागत स्वरूप मिला।
बीते एक दशक के दौरान सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज ने भारत के सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास से जुड़े विषयों पर अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों, परिचर्चाओं, परिसंवादों, व्याख्यानों, पैनल चर्चाओं और अकादमिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और युवाओं ने भाग लिया तथा विभिन्न विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए मंच उपलब्ध हुआ।
नमो अध्ययन केन्द्र की गतिविधियों में प्रकाशन और शोध का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। केन्द्र ने भारत के विकास, सुशासन, शिक्षा, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, नेतृत्व, सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर अनेक पुस्तकों एवं शोधपरक प्रकाशनों का प्रकाशन किया है। इन प्रकाशनों के माध्यम से विभिन्न विचारों और विमर्शों को दस्तावेजीकृत कर व्यापक अकादमिक एवं सार्वजनिक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज ने पिछले वर्षों में विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ अकादमिक सहयोग को भी विस्तार दिया। केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा तथा माता सुंदरी कॉलेज फॉर विमेन, दिल्ली विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के साथ शैक्षणिक समझौता ज्ञापनों के माध्यम से अनुसंधान, नवाचार, ज्ञान-विनिमय तथा संयुक्त अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल की गई है। इन सहयोगों के अंतर्गत संयुक्त शोध, संगोष्ठी, सम्मेलन, कार्यशालाओं तथा शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के बीच संवाद के अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भारतीय ज्ञान प्रणाली और विकसित भारत जैसे विषयों पर भी अपने शैक्षिक एवं अकादमिक कार्यक्रमों का विस्तार किया है। डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के साथ शैक्षिक कार्यक्रमों और विमर्शों के माध्यम से शिक्षा, समावेशन और राष्ट्रीय विकास से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाया गया।
इसी क्रम में राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास उत्थान परिषद , शिक्षा मंत्रालय के साथ भी भारतीय भाषा एवं साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा भारत के व्यापक शैक्षिक एवं सांस्कृतिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों में सहभागिता की गई। इन पहलों के माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और शिक्षाविदों को भारत की भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत पर संवाद का अवसर मिला।
सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज के प्रबंध न्यासी एवं अध्यक्ष प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि दस वर्ष पूरे होना संस्था की अब तक की यात्रा को देखने और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने कहा, “नमो अध्ययन केन्द्र की शुरुआत इस विश्वास के साथ हुई थी कि भारत के परिवर्तन और विकास को समझने, उस पर संवाद करने और उसे दस्तावेजीकृत करने की आवश्यकता है। पिछले दस वर्षों में हमने विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने तथा सार्थक शोध एवं संवाद के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। अब हमारा अगला चरण युवा शोधकर्ताओं, अकादमिक सहयोग, प्रकाशन और ‘विकसित भारत 2047’ की व्यापक दृष्टि पर और अधिक केंद्रित होगा।”
प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज के भविष्य के कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाएगा। उनके अनुसार, “भारत की विकास यात्रा को युवा पीढ़ी की भागीदारी और उसके विचारों को समझे बिना पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। हमारा प्रयास होगा कि विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा पेशेवरों को शोध करने, प्रश्न पूछने, विचारों का आदान-प्रदान करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के अधिक अवसर मिलें।”
अगले दशक में नमो अध्ययन केन्द्र शोध, पुस्तकों एवं प्रकाशनों, नए केन्द्र खोलना, अंतर्विषयी अध्ययन, अकादमिक सहयोग तथा युवा-केंद्रित कार्यक्रमों को और मजबूत करने की दिशा में कार्य करेगा। साथ ही देशभर के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और युवा शोधार्थियों के साथ अपने अकादमिक नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है।
“दस वर्ष पूर्ण होना अंत नहीं, एक नए चरण की शुरुआत है”
प्रो. जसीम मोहम्मद ने सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज की दस वर्ष की यात्रा से जुड़े शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों, विश्वविद्यालयों, संस्थागत सहयोगियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
ट्रस्टी प्रो दिव्या तंवर ने कहा, “दस वर्ष पूरे होना हमारे लिए अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत है। प्रत्येक संगोष्ठी, प्रकाशन, शोध-विमर्श, अकादमिक सहयोग और संवाद ने सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज की यात्रा को समृद्ध किया है। अब हम इसी अनुभव के आधार पर अनुसंधान, संवाद और राष्ट्र निर्माण के लिए और अधिक सार्थक एवं व्यापक मंच तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
विकसित भारत का अर्थ व्यापक राष्ट्रीय विकास, सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज के शोधार्थी तुषिता भंडारी के अनुसार, ‘विकसित भारत’ की अवधारणा केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। इसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक समावेशन, सांस्कृतिक चेतना, जिम्मेदार नागरिकता और युवाओं की सार्थक भागीदारी जैसे आयाम भी शामिल हैं।
नमो अध्ययन केन्द्र के ट्रस्टी एवं जर्नलिज्म टुडे ग्रुप के समूह संपादक जावेद रहमानी ने बताया कि, नमो अध्ययन केन्द्र के दस वर्ष के अनुसंधान, राष्ट्र निर्माण के यात्रा में सरकारी तंत्र के असहयोग से हुई घोर निराशा , सरकार को स्वयं सेवी संस्थानों को जोड़ना चाहिए जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सरकार में बाबूशाही और कुछ खाई के वजह से नहीं हो रहा है; जिनके वजह से केन्द्र सरकार के मंत्रीगण अब स्वयं सेवी संस्थानों के बीच और आम जनता के मध्य नहीं पहुंचते। सरकार और जनता के बीच दूरी बढ़ी है; इस खाई को कम शोध संस्थानों के माध्यम से ही मुमकिन है।
