प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर काशी में संस्कृति, ज्ञान और नवाचार का महासंगम, बीएचयू में सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज द्वारा आयोजित ‘नमो विकसित भारत संवाद’ श्रृंखला का शुभारंभ

‘नमो विकसित भारत संवाद’ श्रृंखला के तहत काशी में सजा भारतीय संस्कृति और नवाचार का मंच

सेंटर फॉर नमो स्टडीज द्वारा ‘नमो विकसित भारत संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत तीन दिवसीय ‘इंडियन कल्चरल इनोवेशन्स कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय )के भारत अध्ययन केंद्र के मानवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र (महामना ऑडिटोरियम) में किया गया। यह आयोजन अशोका इंस्टीट्यूट, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तथा संबद्ध संस्थानों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह की शुरुआत वंदे मातरम्, मंगलाचरण, BHU कुलगीत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर सुश्री श्रेयसी मिश्रा ने गणेश वंदना पर आधारित मनोहारी कथक प्रस्तुति दी, जबकि मंगलुरु के श्रेयश के. बी. ने पारंपरिक यक्षगान की प्रस्तुति से दर्शकों को भारतीय लोक एवं रंग परंपरा से परिचित कराया। मंचासीन अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्रम और स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. शारदेंदु कुमार तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कॉन्क्लेव की पृष्ठभूमि और उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि पद्मश्री अनिल कुमार रस्तोगी ने रंगमंच और अभिनय के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नाटक समाज का सच्चा दर्पण है। उन्होंने कहा कि रंगमंच व्यक्ति के व्यक्तित्व, अभिव्यक्ति और नेतृत्व क्षमता को विकसित करने के साथ-साथ टीम भावना को भी मजबूत करता है। उनके अनुसार रंगमंच केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि अत्यंत व्यावहारिक विधा है, जो कलाकार को एक ‘वन-टेक अभिनेता’ बनने की क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने हिंदी रंगमंच से जुड़े कलाकारों के सामने आजीविका की चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की।

प्रसिद्ध अभिनेता एवं मुख्य वक्ता संजय मिश्रा ने युवाओं से जीवन को प्रसन्नता, सजगता और अपने आसपास की वास्तविकताओं से जुड़कर जीने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति लगातार समाचारों और सूचनाओं के दबाव में जी रहा है, ऐसे में अपने आसपास की वास्तविक परिस्थितियों को देखना और समझना भी उतना ही आवश्यक है।

भाषा और शहरों के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए संजय मिश्रा ने कहा कि समय के साथ भाषा और शहर दोनों बदलते रहते हैं और उनके विकास की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने बनारस की विशिष्ट भाषा, संस्कृति और जीवंत चरित्र को रेखांकित किया। अभिनय के संघर्ष और वर्तमान में केंद्रित रहने की आवश्यकता पर उन्होंने कहा, “मैं कल के बारे में नहीं सोचता, मैं केवल वर्तमान में अभिनय करता हूं।” उन्होंने यह भी बताया कि बनारस से जुड़ी उनकी स्मृतियों पर उनकी आगामी आत्मकथा में विस्तार से चर्चा होगी।

प्रख्यात लेखिका एवं वक्ता डॉ. नीरजा माधव ने हिंदी दिवस के अवसर पर भाषायी अस्मिता और हिंदी के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा के गौरव का संघर्ष तभी मजबूत हो सकता है, जब हम अपनी भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करें। स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी की भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी ने देश को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य किया। उन्होंने इस बात पर विचार की आवश्यकता जताई कि हिंदी को अभी तक देश की सर्वोच्च आधिकारिक भाषा का दर्जा क्यों नहीं मिल सका है।

उन्होंने कहा कि हिंदी की परंपरा विभिन्न भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की रही है, लेकिन इसके साथ संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है, ताकि दूसरी भाषाओं का प्रभाव मूल भाषा की पहचान पर हावी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन भाषायी बाधाएं कई बार योग्य प्रतिभाओं को उचित अवसर मिलने में बाधक बन जाती हैं।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. हरिकेश सिंह ने भारतीय संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए भारतीय दृष्टि और अंतर्दृष्टि को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा को समझने के लिए दृष्टिकोण भी उसकी अपनी बौद्धिक और सभ्यतागत परंपराओं में निहित होना चाहिए।

सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज की ट्रस्टी प्रो. दिव्या तंवर ने बताया कि सेंटर फॉर नमो स्टडीज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्य और विजन की बारह वर्ष की यात्रा को रेखांकित करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी एवं अन्य संस्थाओं के सहयोग से कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये पहल प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित समारोहों का भी हिस्सा हैं और इनमें भारत के विकास, सांस्कृतिक विरासत तथा विकसित भारत के संकल्प में उनके योगदान को केंद्र में रखा जा रहा है।

कार्यक्रम के समापन पर नमो अध्ययन केन्द्र की एडवाइजरी काउंसिल की सदस्य डॉ. अपर्णा सिंह ने मंचासीन मेहमान, वक्ताओं, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार पांडेय ने किया।

कार्यक्रम में सी आई आई योंग इंडियन के यश कुमार जैन और कौशिव अग्रवाल, व्यापारी नेटवर्क के धवल प्रकाश, अंशुमान और अपूर्व तिवारी, स्वाति मित्तल, डॉ. स्वर्ण सुमन, डॉ. प्रीति, AITM की निदेशक डॉ. सारिका श्रीवास्तव सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व, प्रतिभागी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव 16 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसके विभिन्न तकनीकी और अकादमिक सत्रों में भारतीय ज्ञान परंपराओं, संस्कृति और नवाचार से जुड़े विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा।

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