सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ एवं डीएआईसी राष्ट्रीय शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर एन ई पी 2020 पर एक वर्कशॉप आयोजित करेगा एव विकसित भारत शिक्षक पुरस्कार वितरण
पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. निशंक 3 सितंबर को नई दिल्ली में एन ई पी 2020 पर सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज का कार्यशाला में मुख्य अतिथि होंगे, शिक्षकों को विकसित भारत शिक्षक सम्मान भी वितरण

सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ द्वारा आयोजित एवं डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से, राष्ट्रीय शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार, 3 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन: भारत में समावेशी, अभिनव और भविष्य के लिए तैयार उच्च शिक्षा को मजबूत करना” विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करेगा।
इस सेमिनार में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि छत्तीसगढ़ के इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा विशिष्ट अतिथि होंगी। कर्नल आकाश पाटिल परिचयात्मक भाषण देंगे। श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रीमती अंका वर्मा प्रिंसिपल अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल होंगी।
इस कार्यक्रम में ‘विकसित भारत शिक्षक पुरस्कार 2026’ भी प्रदान किए जाएंगे, जिसके माध्यम से सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज उन शिक्षकों को सम्मानित करेगा जिन्होंने शिक्षण, शिक्षा, छात्र विकास और राष्ट्र-निर्माण में बहुमूल्य योगदान दिया है।
सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के चेयरमैन प्रो. जसीम मोहम्मद ने बताया कि, “हम पूरे दिन चलने वाली एक राष्ट्रीय वर्कशॉप आयोजित कर रहे हैं क्योंकि शिक्षा एक मजबूत और विकसित राष्ट्र की नींव है। एन ई पी 2020 ने भारत को भविष्य की सोच वाली दृष्टि दी है, लेकिन इसकी सफलता इसके प्रभावी कार्यान्वयन और शिक्षकों, संस्थानों व युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। हम एक ऐसा मंच बनाना चाहते हैं जहां ये सभी हितधारक एक साथ आ सकें, विचारों का आदान-प्रदान कर सकें और आगे की राह पर चर्चा कर सकें।”
सेंटर फॉर नमो स्ट्डीज जूरी की सदस्य प्रो. दिव्या तंवर ने कहा, “साथ ही, हमारा मानना है कि जो लोग शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं, वे सम्मान के हकदार हैं। ‘विकसित भारत शिक्षक पुरस्कार 2026’ के ज़रिए सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज उन शिक्षकों को सम्मानित करना चाहता है, जिनकी लगन, कड़ी मेहनत और शिक्षा में योगदान हमारे देश का भविष्य संवारने में मदद कर रहे हैं। शिक्षकों को सम्मान देना, असल में शिक्षा के महत्व को भी सम्मान देने का एक तरीका है।”
