जर्मनी में एएमयू शिक्षक ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध प्रस्तुत किया

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा विभाग में जर्मन भाषा के सहायक प्रोफेसर डा. सुबैर पी.एम. ने जर्मनी के ल्यूबेक शहर में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ जर्मन टीचर्स ‘आईडीटी 2025’ में ‘डेरिंग डायवर्सिटी – विद जर्मन’ विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। इसमें दुनिया भर से आए शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने जर्मन भाषा को विदेशी या दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाने के नए और रचनात्मक तरीकों पर विचार विमर्श किया।
डा. सुबैर के शोध पत्र ‘डिस्कर्सिव कल्चरल स्टडीजः डिजिटल युग में भारतीय छात्रों के बीच जर्मन भाषी देशों के बारे में बने स्टीरियोटाइप और विरोधाभासी धारणाएँ’ में यह बताया गया कि भारत में जर्मन सीखने वाले छात्र जर्मनी, ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड को डिजिटल मीडिया के प्रभाव में किस तरह देखते हैं। उन्होंने यह भी समझाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कैसे इन देशों के बारे में गलत धारणाएँ या विरोधाभासी छवियाँ बनाते हैं और इनसे निपटने के लिए भाषा कक्षा में बेहतर शिक्षण रणनीतियों की आवश्यकता है।
डा. सुबैर ने कहा कि जर्मन भाषा शिक्षा में ‘क्रिटिकल डिजिटल लिटरेसी’ को शामिल करने से गहरी सांस्कृतिक समझ विकसित की जा सकती है और पूर्वाग्रहों को दूर किया जा सकता है।
विदेशी भाषा विभाग के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संकाय के डीन प्रो. आफताब आलम ने कहा कि डा. सुबैर की यह प्रस्तुति एएमयू के वैश्विक शैक्षणिक विमर्श में योगदान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और आज के डिजिटल युग में अंतर सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने का महत्व बताती है।
आईडीटी- 2025 में दुनिया भर के जर्मन भाषा शिक्षक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ एक साथ आए और जर्मन भाषा शिक्षण में नई पहलें साझा कीं, जिससे विविधता और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा मिला।
